जगाधरी। मातृ भाषा हिंदी के प्रति विद्यार्थियों की रुचि उत्पन्न करने, उनका भाषायी उच्चारण व लेखन सुधारने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग की ओर से विभिन्न कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में निपुण कार्यक्रम के तहत स्कूलों में रामलीला भी करवाई जा रही है।
वहीं विद्यार्थियों का विशेष रूझान वैश्विक भाषा अंग्रेजी व अन्य देशों की भाषा के प्रति ज्यादा दिखाई दे रहा है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने हिंदी की पाठ्य पुस्तक में बदलाव करने का निर्णय लिया है। इसके लिए स्टेट रिर्सोस ग्रुप (एसआरजी) की ओर से पाठ्यक्रम को सरल व रोचक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग का यह प्रयोग नए सत्र की पाठ्य पुस्तिका में दिखाई देने की संभावना है।
इसके लिए एसआरजी देश के विभिन्न राज्यों की शिक्षा पद्धति व हिंदी पाठ्यक्रम व हिंदी को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी जुटा कर आकलन कर रहे हैं।
इस दौरान प्रदेश के विशेषज्ञों व शिक्षकों का दल पिछले सप्ताह उत्तरप्रदेश के वाराणसी के स्कूलों का भ्रमण किया। वहीं, हिंदी की ज्ञान पीठ मानी जाने वाली बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में विद्वानों से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ाए जा रहे हिंदी पाठ्यक्रम के बारे बताया। वहीं, उत्तरप्रदेश के स्कूलों के हिंदी पाठ्यक्रम की जानकारी ली। हिंदी अक्षर ज्ञान व वर्णमाला के अलावा हिंदी के शब्दों का सही उच्चारण बच्चों को सिखाने के तरीकों को लेकर चर्चा की।
बता दें कि प्रदेश की प्राथमिक पाठशालाओं में पाठ्य पुस्तिका, कार्य पुस्तिका और अध्यापक संर्दिक्षा का प्रयोग किया जाता है। जिसमें बच्चों को हिंदी के उच्चारण, लेखन व शब्दों का अर्थ बताया जाता है।