स्टेडियम में बने हॉल के शीशे टूटे। संवाद
साढौरा। लाहड़पुर गांव में वर्ष 2007 में बनाया गया खेल स्टेडियम देखभाल के अभाव में बदहाल हालात में है। रखरखाव न होने से मैदान में झाड़ियां उग गईं हैं। इसके अलावा पानी निकासी की उचित सुविधा नहीं होने से पानी मैदान में जमा हो रहा है। इससे खिलाड़ी स्टेडियम के बजाय सड़क पर अभ्यास कर रहे हैं। वहीं पेयजल और शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं होने से खिलाड़ियों को काफी परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों राकेश, मोहन व संदीप ने बताया कि 2007 में राजीव गांधी ग्रामीण खेल परिसर का निर्माण होने से ग्रामीणों को अपने क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए यहां सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद जगी थी पर खेल विभाग ने स्टेडियम का निर्माण होने के बाद इसकी सुध नहीं ली। यहां पर किसी भी खेल के लिए कोच का प्रबंध तक नहीं किया गया। खिलाड़ी अपने दम पर ही अभ्यास करते हैं। स्टेडियम के चारों तरफ घास और झाड़ियां उगी हुईं हैं। निकासी न होने से मैदानों में पानी जमा है। चौकीदार की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। कौशल रोजगार के तहत नवंबर 2024 में एक ग्राउंडमैन की नियुक्ति की गई है। रखरखाव के अभाव में स्टेडियम में बने भवनों की छत से पानी टपक रहा है। शौचालयों से टोटियां गायब और खिड़कियों के शीशे भी टूटे पड़े हैं। वहीं लोहे की ग्रिल तक चोरी हो चुकी है। स्टेडियम के मुख्य द्वार से दूसरी तरफ से दरवाजे गायब है। रात के समय में अब यह स्टेडियम नशेड़ियों का अड्डा बना रहता है।
उधर, सरपंच महिंद्र सैनी ने बताया कि सरकार ने खेल स्टेडियम तो बना दिया है पर यहां ना तो पीने का पानी की व्यवस्था है और न शौचालय की व्यवस्था है। महिला खिलाड़ियों के लिए भी अलग से शौचालयों का निर्माण नहीं करवाया गया है। स्टेडियम की कभी भी सफाई नहीं की गई है। इससे स्टेडियम अब गंदगी के ढेर के रूप में बदल चुका है। सरकार को इस खेल स्टेडियम की तरफ ध्यान देना चाहिए।
स्टेडियम में बने हॉल के शीशे टूटे। संवाद