संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में सरकारी स्तर पर खेल कोचों की कमी कई खेलों के खिलाड़ियों को रास नहीं आ रही, चूंकि उन्हें कोचिंग के लिए निजी खेल संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ रहा हैं। निजी कोचिंग के लिए उन्हें जेब ढीली करनी पड़ रही है।
ये देख अभिभावक मांग कर रहे हैं कि जिले में खेल विभाग जरूरी खेलों के कोच नियुक्त करे, जिससे निशुल्क प्रशिक्षण व डाइट खर्च मिलने से अलग-अलग खेलों के बेहतर खिलाड़ी तैयार हो सकें। अभी जिले में सरकारी स्तर पर कुश्ती, फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन, कबड्डी, बॉक्सिंग, जूडो, भारोत्तोलन, तलवारबाजी, लॉन टेनिस व खो-खो के कोच हैं। तेजली स्टेडियम में खेलो इंडिया का लघु शूटिंग केंद्र भी है, जहां शूटिंग स्पर्धा की कोचिंग मिल रही है। अन्य खेलों के लिए विभाग व खिलाड़ी जिले के निजी खेल व शिक्षण संस्थानों पर निर्भर हैं।
सरकारी संस्थानों में विभाग की 30 खेल नर्सरियां हैं। इनमें एथलेटिक्स की आठ, हॉकी व फुटबॉल की पांच-पांच, रेस्लिंग की चार, वॉलीबॉल की दो और बॉक्सिंग, नेटबॉल, बास्केटबॉल, योगा, कबड्डी, कराटे की एक-एक खेल नर्सरी है।
इन संस्थानों से दूर के इलाकों से खिलाड़ी यहां प्रशिक्षण लेने नहीं आ पाते। इस स्थिति के साथ काफी खेलों के कोचों न होने से फायदा निजी खेल संस्थानों को मिल रहा है। शहर से लेकर गांवों में एक के बाद एक निजी खेल संस्थान फलफूल रहे हैं। एक अनुमान मुताबिक जिले में निजी खेल संस्थानों की संख्या 60 हो गई है, जिनमें करीब 3000 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। महंगी कोचिंग देख आर्थिक कमजोर किशोर व युवा अभ्यास से वंचित हैं।
जिनमें अधिक खिलाड़ी उनके जल्द मिलें कोच
निजी खेल संस्थानों में प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ियों के अभिभावकों में विजय कॉलोनी के विकास जैन, सावनपुरी के चिराग सिंघल, यमुना विहार के राजकुमार ने बताया कि सरकारी स्तर पर कोच मिले तो खिलाड़ियों को मुफ्त कोचिंग मिल सकती है, पर कई वर्षों से तेजली स्टेडियम में क्रिकेट, एथलेटिक्स जैसे ज्यादा मांग वाले खेलों के कोच भी नहीं हैं। खेल कोचों के अभाव में खिलाड़ी सरकार से मिलने वाले निशुल्क प्रशिक्षण के साथ डाइट खर्च की सुविधा से वंचित है। खेल विभाग को जिले में जिन खेलों के खिलाड़ी अधिक हैं, उनके कोच देने चाहिएं।
जिले में खेल कोचों की मांग के बारे में मुख्यालय को सूचित किया गया है। जल्द कोच मिलने की उम्मीद है। -शिल्पा गुप्ता, जिला खेल अधिकारी, यमुनानगर।