संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। ऐतिहासिक कपालमोचन मेले में इस बार कपालमोचन, ऋणमोचन व सूरजकुंड सरोवरों में चार फीट तक पानी रहेगा। ताकि, श्रद्धालु बिना किसी गहराई के डर से सरोवरों में स्नान कर सके। वहीं तीनों सरोवरों में पानी को भरने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। सभी सरोवरों में पानी भरने से पहले अच्छे से सफाई की गई।
उधर, इस बार तीनों सरोवरों पर संस्थाओं के वालंटियर भी तैनात रहेंगे। इसका भी शेड्यूल बनाया जा रहा है। बता दें इस बार कपालमोचन मेला एक से पांच नवंबर तक भरेगा। इसमें सात से आठ लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। कपालमोचन विभिन्न वर्गों, धर्मों तथा जातियों की एकता का प्रतीक है। सिख श्रद्धालु हर वर्ष कार्तिक मास की पूर्णिमा के अवसर पर यहां लगने वाले मेले में स्नान करने के लिए पहुंचते हैं।
तीनों सरोवरों में स्नान करने का विशेष महत्व : प्रथम स्नान (कपाल मोचन), द्वितीय स्नान (ऋण मोचन), तृतीय स्नान (सूर्यकुंड) यह स्नान प्रतिदिन एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णमासी पंच भिखी स्नान कार्तिक पूर्णमासी ब्रह्म मुर्हूत प्रातः 4 बजे किया जाता है। ऐसे में इन तीनों सरोवरों का विशेष महत्व है।
स्कन्द पुराण के अनुसार कपालमोचन बहुत प्राचीन तथा ब्रह्म हत्या नाशक पुत्रधन आदि सब कामनाएं पुरी करने वाला पवित्र तीर्थ है। प्राचीन काल में पद्यकल्प में ब्रह्मा जी ने यज्ञ कराने के लिए तीन कुंड बनावाए। वे ही प्लक्ष, सोम सरोवर तथा ऋण मोचन हुए। सोम सरोवर का नाम भगवान शंकर ने कपालमोचन रखा। ब्रहा का सिर काटने के कारण भगवान शंकर को ब्रह्म हत्या का भंयकर पाप लगा। उनके हाथ में ब्रह्म के सिर के समान चिन्ह (निशान) हो गया। सब तीर्थों में स्नान, दान आदि करने से भी वह चिन्ह (निशान) दूर न हुआ। उन्होंने उसी क्षेत्र की भद्रावती नाम के नगरी में देव शर्मा नाम के ब्राह्मण के घर उसकी गऊ के बछडे़ से सोम सरोवर की ब्रह्म हत्या दूर करने की महिमा सुनी।