संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। उपायुक्त प्रीति ने माइनिंग विभाग द्वारा जारी जिला मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड के उपयोग को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस राशि का प्रयोग केवल विकास कार्यों में ही किया जाए। फंड का उपयोग माइनिंग क्षेत्रों में रास्तों को पक्का करने, श्मशान घाटों की मरम्मत, यमुना तटबंधों को मजबूत करने, चारदीवारी निर्माण, हैंडपंप लगाने सहित अन्य जनसुविधा कार्यों में किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संबंधित विभाग समय पर फंड का उपयोग नहीं करता है तो उसे ब्याज सहित राशि वापस करनी होगी। साथ ही किसी भी प्रकार के दुरुपयोग की स्थिति में संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में उपायुक्त ने बताया कि डीएमएफ फंड का एक हिस्सा स्वास्थ्य विभाग को भी जारी किया जाता है ताकि खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत की जा सकें। इसी प्रकार शिक्षा विभाग को स्कूलों की छतों की मरम्मत सहित अन्य कार्यों के लिए फंड दिया जाता है। उन्होंने 13 स्कूलों के लिए आवंटित राशि की जांच कराने के निर्देश दिए। जिन विभागों ने अब तक इस फंड से कार्य करवाए हैं, उनकी विस्तृत जांच करवाई जाए और सभी कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभाग नियमित मॉनिटरिंग करें और फंड के उपयोग में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि खनन लीज होल्डर्स से निर्धारित अंशदान की समय पर वसूली सुनिश्चित की जाए। जिन लीज धारकों ने अभी तक भुगतान नहीं किया है, उन्हें नोटिस जारी कर जल्द वसूली की जाए, अन्यथा नियमानुसार कार्रवाई होगी। खनन गतिविधियों से प्रभावित गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास प्राथमिकता पर किया जाए। उन्होंने बताया कि पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों में कल्याणकारी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त नवीन आहूजा, डिप्टी सीईओ जिला परिषद जसविंद्र सिंह, सहायक खनन अभियंता डॉ. राजेश कुमार सहित कई अधिकारी एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।