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Yamuna Nagar News: चुनावी माहौल में लोगों की जुबां पर अधूरे काम

Wed, 25 Sep 2024 02:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। चुनावी माहौल में नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के अधूरे काम भी मुद्दा बन रहे हैं। राजनीतिक दलों के प्रत्याशी व नेता जनता के बीच अधूरे कामों गिना रहे हैं, वहीं लोग उनसे यह काम पूरे कराए जाने की मांग कर रहे हैं।
चिराग सिंघल ने कहा कि नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी क्षेत्र में गत पांच वर्षों से एलईडी लाइट प्रोजेक्ट अधूरा है। कई वर्षों में आठ वार्डों में ही एलईडी लाइटें लगीं, वह भी पर्याप्त नहीं। इन लाइट में भी कई बंद व खराब हो रही हैं। अन्य 14 वार्ड एलईडी लाइटें प्रोजेक्ट से अछूते रहे। पुराने सोडियम, ट्यूब व सीएफएल लाइटें बंद व खराब हो रही है, जो समय पर सही नहीं होती। इस स्थिति में आधे शहर में शाम बाद अंधेरा रहता है, जिसमें आपराधिक घटनाओं व हादसों की आशंका बढ़ जाती है।
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वीरेन सपरा ने कहा कि नगर निगम पर शहर के विकास का जिम्मा है, पर पांच वर्षों में नगर निगम खुद का नया भवन नहीं बना पाया। अभी नगर निगम के कार्यालय तीन भवनों में चल रहे हैं, जिसमें जगाधरी टाउन चौक व शहीद भगत सिंह चौक समीप स्थित दोनों भवन तंग व खस्ता हाल हैं, जहां पर्याप्त वाहन पार्किंग भी नहीं है। इसके अलावा अन्य परेशानियों से लोग व अफसर दो-चार हो रहे हैं। साथ ही इससे पुराने भवनों को पार्किंग कांप्लेक्स बनाने की योजना भी अधर में लटकी है।
रामआसरा भारद्वाज ने कहा कि शहर की सीमाओं पर चार एंट्री गेट बनने थे, जिसका प्रस्ताव सदन की पहली बैठक में मंजूर हो गया था। पांच वर्ष बाद भी एक भी एंट्री गेट नहीं बन पाया। जबकि इसके लिए बजट व टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। ऐसे ही शहर के बीच कन्हैया साहिब चौक से जम्मू कॉलोनी तक स्टॉर्म ड्रेन भी पांच वर्षों में पूरी नहीं हो पाई। इससे शहर में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या जस की तस बन रही है। इन अधूरे कामों के लिए सीधे अफसर व सरकार जिम्मेदार है।
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विनोद मरवाह ने कहा कि नगर निगम के मूल कामों में एक सफाई में भी गत पांच वर्षों के दौरान सुधार नहीं हो पाया। हालांकि इसके लिए सालाना करोड़ों रुपये खर्चे गए, पर न तो सफाई व कचरा उठान नियमित हुआ और न कचरे का सही निस्तारण। इसके अलावा निगम की जमीनों की निशानदेही व तारबंदी, स्लाटर हाउस, गोशालाएं, वार्डों में सीसीटीवी लगाने, कॉलोनियों के नाम बोर्ड लगाने, स्ट्रे डॉग्स की नसबंदी जैसे काम अधूरे रहे। इसका खामियाजा शहर के लोग भुगत रहे हैं।
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