संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 112वें दिन महा साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने श्रद्धालुओं का सिद्धांतों का महत्व बताया। उन्होंने फरमाया कि सांसारिक जीवन में रहते हुए भी आध्यात्मिक प्राप्ति के मार्ग पर चलने के लिए कुछ सुंदर उपदेश दिए गए हैं।
महा साध्वी ने कहा कि उन सिद्धांतों का पालन करने से न केवल व्यक्ति बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र भी तेज प्राप्त कर सकते हैं। उन सिद्धांतों में समिति और गुप्ति का बहुत महत्व है। बेशक, वे सिद्धांत आध्यात्मिक प्राप्ति या तपस्वी जीवन से संबंधित हैं, लेकिन अगर हम अपने दैनिक कार्यों में लगे रहते हुए उन सिद्धांतों को ध्यान में रखते हैं, तो निश्चित रूप से हम एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
समिति का अर्थ है उन प्रवृत्तियों और कार्यों पर संयम या अनुशासन रखकर जीवन जीना जो हमारे जीवन जीने के लिए आवश्यक हैं। पहली ईर्या-समिति - गति में सीमा,पूर्ण सावधानी और सतर्कता के साथ घूमना कहीं जाना और वापस आना, ताकि किसी जीव को कोई हानि या हिंसा न हो ताकि हमारी गतिविधियों से किसी छोटे से छोटे प्राणी को भी कोई कष्ट या पीड़ा न हो।
दूसरी भाषा-समिति- वाणी में मर्यादा, ऐसी कोई बात न कहना जो किसी को अप्रिय हो अथवा जिससे किसी का हृदय दुखे परंतु ऐसे वचन बोलना जो दूसरों को थोड़ा भी अच्छा लगे मधुर और कोमल ढंग से सत्य बोलना। वाणी मन का सूचक है तीसरी एषणा-समिति- लेखों की सीमा,दोषरहित एवं नियत प्रकार का भोजन करना तथा दोषरहित एवं नियत प्रकार के वस्त्र एवं बर्तनों का ही उपयोग करना (यह बात विशेष रूप से साधु के जीवन पर लागू होती है)। चौथी आवश्यक वस्तुओं को प्राप्त करने और रखने के संबंध में अदायगी-निक्षेपण समिति की सीमा।