संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी बबली भारती ने प्रवचन करते हुए कहा कि मानवीय गुण ही एक मानव को वास्तविक में सर्वश्रेष्ठ प्राणी बनाते हैं।
साध्वी ने कहा कि कुछ महत्त्वपूर्ण नैतिक सूत्र सदा हमारा मार्गदर्शन करते हैं, जब हम इसकी अनदेखी करते हैं, तो यह हमें पतन की ओर धकेल देते हैं। मानव शरीर धारण कर लेना ही आत्मा के उत्थान के लिए पर्याप्त नहीं है। यह कर्म योनि है और इसमें कर्म ही प्रधान है।
उन्होंने कहा कि एक ब्रह्मनिष्ठ संत की कृपा दृष्टि से ही मनुष्य के जीवन का उद्धार हो सकता है। ब्रह्मांड की परम सत्ता के चरणों में शरणागत होने पर सभी प्रकार के सदगुण आचरण में स्वतः प्रकट हो जाते हैं। दया, करुणा, सहनशीलता, नम्रता इत्यादि गुण ही हमें मानवता प्रदान करते हैं। इन सभी गुणों में से नम्रता ऐसा दैवीय गुण हैं, जो मनुष्य को बड़ी से बड़ी विपदा से बचा लेता है।
जिस तरह तूफान आने पर बड़े-बड़े विशाल वृक्ष उखड़ जाते हैं, लेकिन नन्हीं घास तूफान में भी सुरक्षित रहती है। विनम्र स्वभाव से व्यक्ति दूसरों का दिल जीत लेता है। हृदय की नम्रता हर शत्रु को मित्र बनाने के लिए सहायक होती है। किसी फल को देखकर ही हम उसके पक जाने का अंदाजा लगा सकते हैं, इसी प्रकार परिपक्व व्यक्तित्व में नम्रता सहज रूप से ही परिलक्षित होती है। नम्रता वह गुण है जो सभी सकारात्मक गुणों को अपने साथ लेकर आती है।
नम्रता ही मनुष्य की वह शक्ति है जिसके द्वारा वह सारे संसार को अपने आगे झुका सकता है। एक विनम्र व्यक्ति का जीवन गीली मिट्टी की तरह होता है, जिसमें सद्भाव रूपी बीज सहज रूप से ही अंकुरित हो जाते हैं। गुरु की कृपा से मनुष्य के कर्म सद्गामी हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के बिना किसी को गति नहीं मिलती है। मनुष्य को अपने कर्म प्रभु व गुरु चरणों में अर्पित कर चलना चाहिए।