संवाद न्यूज़ एजेंसी
जगाधरी। मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधाम में श्री हंस ज्योति मंदिर जगाधरी में होली पर्व एवं सत्संग का आयोजन किया गया। हंस ज्योति मंदिर की प्रभारी साध्वी सुबोधिनी कहा कि होली अधर्म और अत्याचार पर सत्य, धर्म और सदाचार की विजय का प्रतीक पर्व है। धरती पर अधर्म की बाढ़ में समाज को उबारने और भक्तों को बचाने के लिए भगवान अवतार लेते हैं।
भारत समेत अन्य देशों में भी यह पर्व मनाया जाने लगा है। सतयुग में असुर कुल के राजा हिरण्यकश्यप ने अपने शासन में हर किसी को विष्णु पूजा करने से रोक दिया था। जो कोई विष्णु को पूजा करता उसे हिरण्यकश्यप दंड देता। इसी अधर्मी असुर के घर में प्रहलाद का जन्म हुआ। जिन्हें देवर्षि नारद ने प्रभु नाम की दीक्षा दी और नाम जप करते हुए वे प्रभु भक्त बने। विष्णु भक्ति में लीन प्रहलाद को देख हिरण्यकश्यप प्रभु भक्त को मारने के लिए व्यूह रचना करने लगा।
उन्होंने कहा कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका की गोद में प्रहलाद को बिठा कर उसके चारों तरफ आग लगा दी। भगवान की लीला से होलिका जलकर राख हो गई, लेकिन प्रहलाद को आंच तक न आई। तभी से होली पर्व मनाने की परंपरा निभाई जाती है। भक्त प्रहलाद की श्री हरि के प्रति अटूट भक्ति का पर्व बताता है कि ईश्वर के प्रति अटूट भक्ति भाव व समर्पण करने वालों का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। साध्वी रत्नावली बाई, साध्वी वंदना बाई ने सत्संग से भक्तों को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर प्रधान अजब सिंह, पवन गोयल, अमित भारती, चौधरी राहुल, नौरतिराम, विशाल, सोनू, डॉ. संतोष शर्मा, सोहन सिंह आदि मौजूद रहे।