कमजोर मानसून के चलते पहाड़ों पर भी सूखे की स्थिति बनी हुई है। इसका असर हरियाणा और उत्तर प्रदेश को मिलने वाले पानी पर पड़ रहा है।
हथनीकुंड बैराज से हरियाणा और उत्तर प्रदेश को मांग के अनुरूप पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। बैराज से हरियाणा की ओर बहने वाली पश्चिमी यमुना नहर में मांग से लगभग आधे पानी की सप्लाई हो रही है। वहीं उत्तर प्रदेश की पूर्वी यमुना नहर में मांग और आपूर्ति का अंतर चार गुना तक पहुंच चुका है।
यमुना नदी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से होते हुए मैदानी इलाकों में सर्वप्रथम खिजराबाद में पहुंचती है। यहां बने हथनीकुंड बैराज से हरियाणा की ओर पश्चिमी यमुना नहर बहती है, जिसे दक्षिण हरियाणी की लाइफ लाइन माना जाता है।
अमूमन जुलाई माह में यमुना में इतना पानी रहता है कि पश्चिमी यमुना नहर की पानी की मांग पूरी हो जाती है, लेकिन इस बार स्थिति काफी बिगड़ी हुई है।
सिंचाई विभाग के मुताबिक जुलाई माह के दूसरे हफ्ते में नहरों की मांग और सप्लाई में अंतर लगातार बढ़ रहा है। गत आठ जुलाई को पश्चिमी यमुना नहर का अधिकतम इंडेंट (पानी की मांग) 9000 क्यूसिक था और आपूर्ति 5322 क्यूसिक हुई। वही 11 जुलाई को इंडेंट 10500 क्यूसिक पर पहुंच गया, जबकि नहर में आपूर्ति 8135 क्यूसिक की गई। इसी प्रकार 12 जुलाई को 10500 क्यूसिक पानी की मांग पर 6031 क्यूसिक पानी नहर में छोड़ा गया। उधर, उत्तर प्रदेश की पूर्वी यमुना नहर में नौ जुलाई को पानी की मांग तीन हजार क्यूसिक थी, जबकि नहर को मात्र 816 क्यूसिक पानी मिल पाया।
यमुना नदी क्षेत्र में गिर रहा है भूजल स्तर
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बहने वाली यमुना नदी के कैचमेंट एरिया में बारिश होने पर यमुना नदी का जलस्तर बढ़ता है। यह पानी पौंटा साहिब होते हुए खिजराबाद पहुंचता है। यहां बने हथनीकुंड बैराज से हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लिए यमुना के पानी का बंटवारा किया जाता है। जुलाई माह में मानसून कमजोर होने से जहां हरियाणा की पश्चिमी यमुना नहर और उत्तर प्रदेश की पूर्वी नहर को मांग के अनुसार पानी नहीं मिल पा रहा है। इन दिनों हथनीकुंड बैराज से यमुना नदी के हिस्से में प्रतिदिन 162 क्यूसिक पानी ही आ रहा है। इससे यमुना नदी के आसपास के इलाकों में रिचार्जिंग नहीं हो पा रही है, जिससे भूजल स्तर नीचे गिर रहा है।
रविवार को एक घंटे तक मिल पाया इंडेंट के मुताबिक पानी
रविवार को पौंटा साहिब में हुई बारिश के बाद हथनीकुंड बैराज से पश्चिमी और पूर्वी यमुना नहर में करीब एक घंटे तक मांग के अनुरूप पानी छोड़ा गया। सिंचाई विभाग के मुताबिक दोपहर करीब 12:30 बजे से करीब डेढ़ बजे तक पश्चिमी यमुना नहर में 10500 क्यूसिक और पूर्वी यमुना नहर को तीन हजार क्यूसिक पानी मिला। इसके बाद यमुना का जलस्तर गिरने लगा और शाम चार बजे बैराज से पश्चिमी यमुना नहर में 10500 क्यूसिक की मांग पर 6500 क्यूसिक पानी छोड़ा गया।
बारिश नहीं हुई तो दक्षिण हरियाणा में बढ़ेगा पेयजल संकट
पश्चिमी यमुना नहर दक्षिण हरियाणा के जिलों में बहती है। नहर का पानी दक्षिण हरियाणा के जिलों में पीने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। प्रदेश में पहले ही सूखे के हालात बने हुए हैं। ऐसे में नहर को मांग से कम पानी मिलने से दक्षिण हरियाणा में पेयजल संकट भी गहरा रहा है। यदि पहाड़ों और प्रदेश में जल्द बारिश नहीं हुई तो दक्षिण हरियाणा में पेयजल की भारी किल्लत हो सकती है।