संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मां अपने बच्चों से और बच्चे मां से कितना प्यार करते हैं, यह जताने के लिए दोनों को किसी दिवस का इंतजार नहीं होता। बेटा मां के पास रहे या फिर उनसे सैकड़ों किलोमीटर दूर, मां का प्यार कभी कम नहीं होता। आज मातृ दिवस है। बच्चे अपनी मां को कोई न कोई उपहार जरूर दे रहे होंगे। इस बार मातृ दिवस पर माताएं अपने लिए कोई उपहार नहीं बल्कि सीमा पर तैनात अपने बेटों की सलामती के लिए दुआएं मांग रही हैं।
खंड साढौरा के कल्याणपुर गांव की 70 वर्षीय रहमत ने देश को दो-दो फौजी बेटे दिए हैं। छोटे बेटे जुल्फान वर्ष 2000 से 2018 तक फौज में रहने और हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए। बड़े बेटे सेना में एएसआई अली हसन चीन बॉर्डर पर तैनात हैं। वर्ष 1995 में भर्ती हुए अली हसन जम्मू कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश, आंध्रप्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़ में ड्यूटी कर चुके हैं। इस बार अली हसन घर पर ईद मनाकर ड्यूटी पर लौटे थे।
रहमत ने बताया कुछ दिन से पाकिस्तान के साथ जो हालात बने हुए हैं तब से बेटे की सुरक्षा को लेकर थोड़ी चिंतित रहने लगी हूं। वैसे तो बेटा पाकिस्तान की सीमा से बहुत दूर है, लेकिन युद्ध हुआ तो क्या पता उसे भी जंग के मैदान में जाना पड़ जाए। इसलिए अब हर एक-दो दिन में बेटे से बात कर रही हूं। बेटा हर बार उसे कहता है कि वह चिंता न करे। वह ठीक है।
रहमत का कहना है कि एक मां होने के नाते उसका बेटे के प्रति मोह ज्यादा है, लेकिन उसकी देश के प्रति जिम्मेदारी ज्यादा है। उन्होंने बेटे से कहा है कि यदि जंग में जाने का मौका मिले तो पीछे नहीं हटना, क्योंकि देश पहले और उसके बाद परिवार है। जंग जीतना और देश की आन, बान व शान को बरकरार रखना है। वे बेटे से कहती हैं कि मौका मिलते ही दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देना।