संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम की घड़ी करीब आ गई हैं। इससे उत्साह के साथ विद्यार्थियों की चिंता भी बढ़ रही है। विद्यार्थियों के साथ अभिभावक भी बेहतर परिणाम की आस लगाए बैठे हैं, पर मनोचिकित्सक की मानें तो परीक्षा परिणामों में अधिक नंबर की होड़ में बढ़ता दबाव तनावग्रस्त कर सकता है। इसी तनाव में गत वर्षों में आत्महत्या के मामले भी सामने आए।
ऐसी घटना न हो, इसलिए अमर उजाला ने शहर के मनोचिकित्सकों से बात की। इसमें विद्यार्थियों व अभिभावकों को तनाव से बचाने के लिए मनोचिकित्सकों ने उपाय साझा किए। कहा कि अंक तय नहीं करते कि कौन कितना काबिल है, इसलिए अधिक अंकों की होड़ व दूसरों से तुलना छोड़े। परीक्षा परिणाम कम भी आएं तो तनाव लेने के बजाय इसे सीख के रूप में स्वीकार करें।
मनोचिकित्सक डॉ. विक्रम भारती ने कहा कि परीक्षा परिणाम जिंदगी की अंतिम सीढ़ी नहीं। यह केवल एक सीढ़ी मानी जा सकती है। इस सीढ़ी पर न भी चढ़ पाए तो भविष्य में अलग-अलग क्षेत्र में प्रतिभा दिखाने के लिए कई सीढि़यां मिलेंगी। अभिभावक भी मार्कशीट पर फोकस न रखें, क्योंकि कई ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने परीक्षाओं में कम अंक लाने के बावजूद अलग-अलग क्षेत्रों में नाम बनाया है। हर बच्चे में कोई न कोई प्रतिभा छिपी है, इसलिए उसे अंकों के आधार पर कम आंकना गलत है।
यह भी हो सकता है कि जो बच्चों कम अंक ला रहा है, वह अधिक अंक लाने वालों से किसी कला या क्षेत्र में आगे हो। इसलिए बच्चे पर अधिक अंकों का दबाव न बनाएं और दूसरों से उसकी तुलना छोड़े। जो परीक्षा परिणाम आए, उसे एक सीख के रूप में स्वीकार करें। वर्चुअल वर्ल्ड से बाहर निकल रियल वर्ल्ड में आएं। दिनचर्या में व्यायाम जरूर शामिल करें।
मनोचिकित्सक डाॅ. दिव्य मंगला ने कहा कि परीक्षा परिणाम की चिंता स्वाभाविक है, पर विद्यार्थी व उनके अभिभावक यह ख्याल रखें कि यह चिंता जरूरत से ज्यादा न बढ़ जाए। क्योंकि अधिक चिंता तनाव का रूप ले लेती है। इससे नींद न आने, घबराहट होने, दिनचर्या बिगड़ने, भूख कम लगने और किसी काम में आनंद व रूचि न रहने जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं।
इससे बचाव के लिए विद्यार्थी अपने सहपाठियों, मित्रों, भाई-बहन, माता-पिता व बुजुर्गों से बातचीत करते रहे। हो सके तो परीक्षा परिणाम के अलावा अन्य विषयों पर बात करें। अगर परीक्षा परिणाम के लिए कोई डर या चिंता का भाव आ भी रहा है तो उसे तुरंत आसपास किसी से साझा कर लें। दिनचर्या में योग, ध्यान व व्यायाम को शामिल करें। खेलकूद या फिल्म देखकर मनोरंजन करें। मोबाइल से ज्यादा घर व बाहर किसी न किसी काम में व्यस्त रहें।
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