संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। आग खेतों में बचे गेहूं के फानों में लगाई जा रही है और इसका खामियाजा सड़क किनारे खड़े हरे भरे पेड़ों को भुगतना पड़ रहा है।
किसानों द्वारा खेतों में लगाई गई आग के कारण अब तक सैकड़ों पेड़ भेंट चढ़ चुके हैं। कई पेड़ तो इतने भारी भरकम थे जो इस आग से नहीं बच सके। इनका आधे से अधिक हिस्सा जल चुका है। जिस कारण यह कभी भी गिरने की कगार पर पहुंच गए हैं।
संभवत: भविष्य में कोई आंधी तूफान आया तो सबसे पहले यही जले हुए पेड़ सड़कों पर गिर सकते हैं, क्योंकि जलने के बाद ये पेड़ कमजोर हो चुके हैं।
जगाधरी-बिलासपुर स्टेट हाईवे, बिलासपुर-साढौरा मार्ग, रणजीतपुर रोड, साढौरा-रणजीतपुर रोड, सरस्वतीनगर, रादौर, सहारनपुर रोड़ व जगाधरी में दर्जनों जगह सड़कों किनारे खड़े पेड़ आग में जल चुके हैं। दरअसल खेतों में गेहूं की कटाई पूरी हो चुकी है। कटाई के बाद खेतों में गेहूं की फसल के फाने बचे हुए हैं। 15 जून से खेतों में धान की रोपाई शुरू होनी है। इससे पहले खेतों को तैयार करने के लिए खेतों में बचे फानों में आग लगाई जा रही है।
खेतों में लगाई गई यह आग सड़कों किनारे खड़े पेड़ों तक पहुंच जाती है। कई जगह तो आग की लपटें इतनी ऊंची उठी रहती हैं कि पेड़ों पर लगे पत्ते तक सूख गए हैं। कई पेड़ों की जड़ों में आग सुलग रही है। लोग भी पेड़ों में लगी आग को देख कर चुपचाप आगे बढ़ जाते हैं। वह दमकल विभाग को सूचना देने की भी जहमत नहीं उठाते।