सरस्वती नगर। जिले में सरकारी स्तर पर पांच खंडों में कॉलेज हैं। इसके बाद भी पिछले कई वर्षों में युवाओं का रुझान नजदीक बने सरकारी कॉलेज से ज्यादा दूर के एडेड व सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में ज्यादा रहा। इसकी वजह सरकारी कॉलेजों में सुविधाओं की दरकार है। जिले के पांच सरकारी कॉलेजों में सबसे खराब स्थिति सरस्वती नगर के सरकारी कॉलेज की है, जिसे पांच वर्षों से अपना भवन भी नहीं मिल पाया। ऐसे में यहां न नए कोर्स शुरू हो पा रहे हैं और न विद्यार्थियों की संख्या बढ़ पा रही है। सरकारी कॉलेज में भवन व अन्य सुविधाओं सहित पसंदीदा कोर्स न होने से आसपास के ग्रामीण युवा नजदीक में सरकारी कॉलेज होने के बाद भी दूर के एडेड व सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों के अधिक खर्चीले कोर्स की ओर रुख कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार सरस्वती नगर का सरकारी कॉलेज पांच साल से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के भवन के कमरों में चल रहा है। यहां शुरुआत से अब तक 12वीं पास विद्यार्थियों के लिए यूजी में बीए व बीकॉम कोर्स ही हैं। सरस्वती नगर में बीए की 160 व बीकॉम की 80 सीटें हैं। स्टाफ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दोनों कॉलेजों के लिए सरकारी स्कूलों में मिले कमरों की संख्या ऑफिस वर्क और क्लासेस लगाने के लिए कम हैं। स्कूल में कर्मचारी भी पूरे नहीं है। ऐसे में चाहकर भी नए कोर्स की मांग नहीं कर पाते हैं। कॉलेज के भवन के लिए औपचारिकताएं संबंधित विभाग द्वारा कई वर्षों बाद भी पूरी नहीं हो पाई हैं।
युवतियों को ज्यादा परेशानी, 12वीं के बाद छोड़ देतीं हैं पढ़ाई
सरकारी कॉलेज में भवन व अन्य सुविधाएं सहित स्टाफ की कमी देख क्षेत्र के युवाओं का यहां के कम खर्च के कोर्स होने के बावजूद रुझान कम हो रहा है। यहां मौजूद बीए, बीकॉम की पूरी सीटें भी कई बार पूरी नहीं भर पाती हैं। उन्हें दूसरे ब्लॉक के सरकारी कॉलेज या एडेड और सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में अधिक खर्चीले कोर्स करने पड़ रहे हैं, पर ये कॉलेज दूरस्थ स्थानों पर होने के चलते ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश युवतियों ऐसा न कर 12वीं बाद उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। सरस्वती नगर के सुरेश, गोल्डी, सन्नी ने कहा कि भले खंड में सरकारी कॉलेज की सुविधा है, पर पांच वर्षों से कॉलेज काे अपना भवन नहीं मिल पाया है। भवन की कमी में न नए कोर्स बढ़ रहे हैं और न स्टाफ। ऐसे में विद्यार्थियों की संख्या भी नहीं बढ़ पा रही है। सरकार व संबंधित विभाग को चाहिए कि कॉलेज को जल्द अपना भवन मुहैया कराए, जिससे यहां नए कोर्स शुरू हो पाएं। तभी खंड स्तर पर सरकारी कॉलेज शुरू करने की योजना कारगर साबित हो पाएगी।