व्यासपुर। राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय कृष्ण कथा के पांचवें दिन कथा व्यास साध्वी कालिंदी भारती ने श्रद्धालुओं को प्रभु भक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भक्ति के बिना मानव जीवन बेकार है। भगवान भक्तों के हर भाव को स्वीकार करते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे इतिहास में भक्तों की गाथाएं आती हैं जिनमें तप, त्याग और समर्पण झलकता है। भक्त करमा बाई की जीवन गाथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की अत्यंत प्रिय भक्त करमा बाई ने आजीवन भक्ति भाव से भगवान की सेवा की। प्रत्येक दिवस खिचड़ी का भोग लगाकर अपने भावों को अर्पित करती थीं। उन भावों द्वारा ही जगन्नाथ भगवान इतना रीझ गए कि स्वयं एक बालक का रूप बनाकर माता करमा बाई की खिचड़ी खाने के लिए पहुंच जाते थे। जब माता करमा बाई ने अपना देहत्याग किया, उसके पश्चात कई दिनों तक जगन्नाथ भगवान की आंखों से अश्रु धारा बहती रही। जब पुजारी ने भगवान को करमा बाई की खिचड़ी के नाम से भोग लगाया तो भगवान जगन्नाथ की अश्रु धारा रुक गई। आज भी भगवान जगन्नाथ के मंदिर में माता करमा बाई की खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। भगवान अपने भक्तों के हर भाव को स्वीकार करते हैं, लेकिन वे भाव स्वार्थ और अहंकार से कलुषित न हों, अपितु श्रद्धा, विश्वास और समर्पण से परिपूर्ण हों। माता करमा बाई कोई विशेष विधि विधान से भगवान का व्रत पूजन उपवास नहीं करती थीं अपितु जिन सुंदर भावों के द्वारा वो भगवान के लिए अपने हाथों से खिचड़ी तैयार करती थी। उन भावों ने ही भगवान को स्वयं आने के लिए बाध्य कर दिया। साध्वी जी ने कहा कि आज हम कहते हैं कि भगवान सुनते नहीं है, लेकिन भगवान को सुनाने का हुनर भक्तों के पास होता है। हम भी उन्हीं महान भक्तों की जीवन गाथाएं सुनकर और पढ़कर ये हुनर सीख पाए।