जी-20 शिखर सम्मेलन में जहां एक ओर भारत ने नया इतिहास रचा है, वहीं टोपरा कलां का विशेष रूप से जिक्र कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यमुनानगर को देश-विदेश में विशेष पहचान दिलाई है। उन्होंने भाषण के दौरान विदेशी मेहमानों को न सिर्फ अशोक स्तंभ से रूबरू कराया बल्कि 2500 साल पुराने टोपरा कलां के इतिहास की भी याद दिलाई, जहां से फिरोजशाह तुगलक अशोक स्तंभ को उखाड़कर दिल्ली के कोटला मैदान ले गया था।
2500 साल पहले फिरोजशाह ले गया था दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 के शिखर सम्मेलन की शुरुआत उस पैगाम से ही की जो भारत की सरजमीं से 2500 साल पहले दुनिया को दिया गया था। मोदी ने कहा कि ये शिलालेख, दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में मौजूद अशोक स्तंभ पर गढ़ा हुआ है, जिसे 2500 साल पहले सम्राट अशोक द्वारा स्थापित किया गया था। पाली और संस्कृत भाषा में मिश्रित ये शिलालेख, मानवता का कल्याण और सदैव सुख सुनिश्चित करना बताता है।
विदित हो कि फिरोज शाह तुगलक ने टोपरा कलां गांव से इस स्तंभ को तुड़वा दिया था और इस 27 टन वजनी स्तंभ को यमुना नदी के रास्ते कोटला नई दिल्ली ले गया, जहां वह अपने नए शहर का निर्माण कर रहा था। इस स्तंभ को मिनारे-ए-ज़रीन भी कहा जाता था जिसका अर्थ है सोने का स्तंभ। तुगलक काल के इस्लामी पाठ में यह उल्लेख किया गया है कि यह हरियाणा के सभी अशोक स्तंभों में सबसे चमकीला स्तंभ था। आज भी हम इस स्तंभ के ऊपर चमक देख सकते हैं।
सरपंच और अन्य ग्रामीणों ने जताई खुशी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जी-20 शिखर सम्मेलन में टोपरा कलां का जिक्र होने से स्थानीय सरपंच और ग्रामीणों में उत्साह है। सरपंच बलराम के साथ समस्त ग्रामवासी इस बात से खुश हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी 20 सम्मेलन में टोपरा कला और अशोक स्तंभ का जिक्र कर विश्व शांति का संदेश दिया। पूर्व सरपंच रामकली पंजेटा और मुनीष नेहरा ने भी इस पर प्रसन्नता जताई है।
प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 शिखर सम्मेलन में अशोक स्तंभ का जिक्र कर न सिर्फ शांति और समृद्धि का संदेश दिया है, बल्कि दुनिया में यमुनानगर और टोपराकलां को विशेष पहचान दिलाई है। यह ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों के लिए भी गर्व की बात है। इससे गांव को विशेष स्तर पर ख्याति मिली है। साथ ही ग्रामीणों में भी काफी उत्साह है।
-सिद्धार्थ गौरी, जनरल सेक्रेटरी, द बुद्धिस्ट फोरम।