आज के समय में मुफ्त कुछ भी नहीं मिलता, उसके लिए आपको कुछ न कुछ कीमत जरूर चुकानी पड़ती है। कुछ ऐसा ही देखने को मिला रक्षाबंधन के मौके पर रोडवेज द्वारा बहनों के चलाई गई मुफ्त बस सेवा के दौरान। बहनों के लिए यात्रा मुफ्त कर दी गई, लेकिन इसकी कीमत उन्हें धक्का-मुक्की और परेशानी झेलकर चुकानी पड़ी। बसों में भीड़ के चलते महिलाओं को खड़े होकर सफर करते हुए देखा गया।
बात देें कि मंगलवार दोपहर 12 बजे से शुरू हुई बहनों की मुफ्त सफर की सुविधा के लिए डिपो की 190 में ऑनरूट 172 बसों में कइयों के रूटों पर टाइम बढ़ाए गए वहीं, ऑन डिमांड चलाने को कई बसें रिजर्व भी रखीं गईं। बावजूद इसके शाम चार बजे बसों में बढ़ी भीड़ के आगे अफसरों की योजना फेल हाेती दिखी। चूंकि भीड़ के चलते बसों में चढ़ने को लेकर मारामारी की स्थिति हो गई। सभी बस स्टैंड पर देर शाम तक रही भीड़ के बीच पहले बहनें बसों में चढ़ने फिर उनमें सीट पाने के लिए मशक्कत करतीं नजर आईं। परेशानी झेल रहीं महिलाओं ने इस मौके पर केवल महिला स्पेशल बसें चलाने की मांग रखी। बता दें कि प्रदेश सरकार ने रक्षाबंधन के अवसर पर प्रदेश की महिलाओं व उनके 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए हरियाणा रोडवेज बसों में 29 अगस्त को दोपहर 12 बजे से 30 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे तक मुफ्त यात्रा की सुविधा दी है।
भाइयों के घर राखी बांधने के लिए ज्यादातर महिलाएं बच्चों संग दोपहर बाद बस स्टैंड पहुंची। इसी दौरान शिक्षण संस्थानों से छुट्टी कर विद्यार्थी भी पहुंचे। साथ ही नौकरीपेशा लोग भी बस स्टैंड पहुंच गए। इसी कारण दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक बस स्टैंड पर सामान्य दिनों की तरह भीड़ रही, पर इसके बाद सभी बस स्टैंड परिसर महिलाओं सहित अन्य यात्रियों से भरे दिखे। वेटिंग हाल में बैठने को भी जगह नहीं रही और महिलाएं व अन्य यात्री फर्श पर बैठे नजर आए।
किसी भी रूट की बस आने पर सभी बस में चढ़ने के लिए भागते दिखे। इस बीच महिलाओं और उनमें भी बुजुर्गों व बच्चों को बसों में चढ़ने में मशक्कत हुई। क्योंकि कहने को महिलाओं के लिए मुफ्त सफर की सुविधा थी, पर बसों में चढ़ने को लेकर पुरुष यात्री आगे रहे। इसी कारण कई महिलाओं के सामने से एक के बाद एक दो तीन बसें निकल गई और वह खुद व बच्चों संग उनमें चढ़ नहीं पाईं। जो महिलाएं किसी तरह बस में चढ़ पाई, उनमें भी अधिकांश को बसों में सीट नहीं मिली। जो खड़े होकर ही बस में सफर करती दिखी।
काउंटर पर बस के इंतजार में खड़ी राजकुमारी ने बताया कि उसे सात साल के बेटे सन्नी के साथ सहारनपुर जाना है, पर एक घंटे में एक बस आई। उसमें भी भीड़ अधिक होने के कारण वह चढ़ नहीं पाई। अब आधे घंटे इंतजार के बाद भी दूसरी बस नहीं आई है। ऐसे ही सहारनपुर जाने के लिए खड़े संतोष, बबली, अंतिका ने बताया कि वह पौने घंटे से बस के इंतजार में खड़े हैं।
बस स्टैंड पर मिली दशमेश कॉलोनी की सुनीता, बूड़िया की रजनी, कुरुक्षेत्र से आई भारती ने कहा कि बहनों को बसों में मुफ्त बस सुविधा में केवल महिला स्पेशल बसें चलाई जानी चाहिए। ताकि उन्हें बसों में चढ़ने और सीट लेने में आसानी हो। क्योंकि नौकरीपेशा व विद्यार्थी वर्ग से बढ़ी भीड़ के बीच महिलाएं सामने से निकली कई बसों में नहीं चढ़ पाईं।
रक्षाबंधन पर महिलाओं को मुफ्त बस सुविधा के लिए दिल्ली के दो, चंडीगढ़ के तीन व अन्य साथ लगते जिलों के रूटों पर बसों के दो से तीन टाइम बढ़ा दिए हैं। फिर भी किसी रूट के काउंटर पर यात्री अधिक दिखते हैं तो उसके लिए रिजर्व में रखी बसें तुरंत चलाई जा रही हैं।
- भीम सिंह, ड्यूटी इंस्पेक्टर, यमुनानगर डिपो (हरियाणा रोडवेज)।