नगली गांव के पास खेतों में देर रात एक ढाई वर्षीय मादा तेंदुआ शिकारियों द्वारा बनाए गए फंदे में बुरी तरह फंसकर घायल हो गया।
वन्य प्राणी और वन विभाग ने कई घंटों की मशक्कत के बाद उसे फंदे से आजाद किया जा सका। फंदे से तेंदुआ का एक पैर बुरी तरह जख्मी हो गया।
वन्य प्राणी व वन विभाग ने उसे बेहोश कर पकड़ा और उपचार के लिए वन्य प्राणी कार्यालय कलेसर ले गए, जहां डाक्टरों की टीम उसके उपचार में लगी है। जानकारी के अनुसार खंड छछरौली के नगली व सलेमपुर कोही के ग्रामीणों ने गांव के खेतों में जानवर की आवाज सुनी।
जिसके बाद गांव का महेंद्र सिंह खेताें में गया। उसने वहां देखा कि तेंदुआ फंदे में फंसा है। इसकी सूचना उसने नजदीक की वन विभाग की चौकी को दी। जिसके बाद वन्य प्राणी विभाग के निरीक्षक राजेश चहल और उनकी टीम के राजपाल, रमेश, राजबीर साथ मौके पर पहुंचे।
वहां उन्होंने देखा की एक तेंदुआ फंदे में फंसा है। मौके पर काफी भीड़ और शोर के कारण तेंदुआ बेहोश नहीं हो पा रहा था। इसलिए लोगों को काबू करने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
स्पेशल पिंजरे ले गए
वन्य प्राणी व वन विभाग की टीम तेंदुए के बेहोश न होने के कारण परेशान हो गई। आखिर टीम ने एक बड़ा जाल मंगवाया और कर्मचारियों ने उसे जाल की मदद से पकड़ लिया। जिसके बाद पशु चिक्तिसक सुखबीर नैन ने तेंदुए को इंजेक्शन लगाकर बेहोश किया।
तेंदुए को बेहोश करने के बाद वन्य प्राणी विभाग उसे अपने स्पेशल पिंजरे में कलेसर कार्यालय ले गए। चिकित्सक सुखबीर नैन ने बताया कि उपचार के बाद जैसे ही वह चलने लायक हो जाएगा, उसे कलेसर नेशनल पार्क में छोड़ दिया जाएगा।
वहीं, इस बारे में डीएफओ रविंद्र धनखड़ का कहना है कि यह सारी साजिश शिकारियों की हैं। शिकारी इस तरह के फंदे को जंगली जानवर पकड़ने के लिए इस्तेमाल करते हैं।