गंदगी से बदहाल शहर की बदहाल तस्वीर को बदलने में नगर निगम अधिकारी कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। शहर में हर तरफ कूड़े के ढेर लगे हैं, लेकिन अभी तक सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए निगम ने क्षेत्र को चार जोन में बांटने पर फैसला लेने के बाद कोई प्रस्ताव पास किया है।
न ही पार्षद इस बारे में कोई कदम उठा रहे हैं न ही अधिकारी। सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए गत माह नगर निगम अधिकारियों ने शहर को चार जोन में बांटने का फैसला लिया था।
इस प्रस्ताव को निगम की 14 अक्टूबर को हुई पहली बैठक में पास कराने के लिए रखा गया, लेकिन भाजपा पार्षदों की ओर से इस पर आपत्ति जताई गई थी। जिस पर निगम आयुक्त ने फैसला पेंडिंग रख दोबारा से बैठक करने की बात कही थी। बैठक नगर निगम के संयुक्त आयुक्त की अध्यक्षता में होनी थी।
इस बात को एक माह से ज्यादा समय हो गया है लेकिन उसके बाद न कोई बैठक हुई और न ही शहर को सफाई के लिए चार जोन में बांटने पर कोई फैसला हो पाया। इससे दिक्कत शहरवासियों का उठानी पड़ रही है। क्योंकि शहर में फैली गंदगी किसी से छुपी नहीं है। हालात दिन प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं।
ये था प्रस्ताव में
निगम की पहली बैठक में शहर को साफ सुधरा रखने के लिए चार जोन में बांटने के प्रस्ताव में निगम अधिकारियों ने कहा था कि जो जोन बनाए जाएंगे, उनमें तीन जोन ठेके पर दिए जाएंगे और एक जोन में निगम कर्मचारी काम करेंगे।
निगम के नियमित कर्मचारियों द्वारा वार्ड-3, 4, 7, 8, 9, 10, 11,12 और 18 में सफाई करने की बात प्रस्ताव में रखी गई थी। अन्य में सफाई का कार्य ठेके के माध्यम से कराने की बात प्रस्ताव में थी। लेकिन इस पर भाजपा के पार्षद और सीनियर डिप्टी मेयर पवन बिट्टू और पार्षद संगीता सिंधल की ओर से विरोध जताते हुए कहा गया कि जोन में बांटने से पहले हमारी राय नहीं ली गई है।
इस पर दोबारा से विचार करने और उनकी राय भी शामिल करने की जरूरत है। इस पर डीसी मंदीप बराड़ ने संयुक्त आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी, जिसे एक सप्ताह में स्थिति साफ करने का समय दिया गया था, लेकिन यहां तो एक माह से भी ज्यादा समय हो गया है अब तक न तो मीटिंग हुई और न ही कोई फैसला हो पाया।
अभी यह है हाल
शहर में इन दिनों सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। गत दिनों कपालमोचन मेले में सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी वहां पर लगा दी गई थी, जिससे हालात और बदतर हो गए। इसके साथ ही नगर निगम के पास पर्याप्त कर्मचारी भी नहीं है, जिससे भी शहर के सभी वार्ड, कॉलोनियों और गलियों की सफाई नहीं हो पा रही है।
अगर जोन में बांटने पर फैसला हो जाता है तो 20 वार्ड में से 11 वार्ड ही निगम के नियमित कर्मचारियों के पास रहेंगे। अन्य नौ वार्ड में ठेकेदार के कर्मचारी सफाई व्यवस्था को संभालेंगे।
‘जिस एरिया में गंदगी ज्यादा, उसे ठेके पर दो’
भाजपा पार्षद और सीनियन डिप्टी मेयर पवन बिट्टू का कहना है कि शहर को जो चार जोन में बांटने की बात है इसे लेकर हमने अपने सुझाव तैयार कर लिए हैं। इसमें हमारा सुझाव रहेगा कि जिस क्षेत्र से नाला गुजर रहा है या जहां पर गंदगी की समस्या अधिक है, वहां पर नियमित कर्मचारियों की बजाए ठेके पर काम दिया जाए। क्योंकि नियमित कर्मचारी सही तरीके से काम नहीं करते। उनका कहना है कि जब भी मीटिंग होगी, उसमें हमारी ओर से अपने सुझाव रखे जाएंगे।