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Yamuna Nagar News: जिले में पहली बार कम हुई यूरिया के 6.136 लाख बैग की खपत

Sat, 02 May 2026 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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शहर में जाता यूरिया से भरा ट्रक। संवाद - फोटो : 1
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिले में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान यूरिया की खपत में पहली बार इतने बड़े स्तर पर कमी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में जहां जिले में 1,52,725.068 मीट्रिक टन यूरिया की खपत हुई थी, वहीं 2025-26 में यह घटकर 1,25,114.692 मीट्रिक टन रह गई। इस प्रकार 27,610.376 मीट्रिक टन यानी 22.06 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह कमी लगभग 6.136 लाख यूरिया बैग के बराबर है।
इससे सरकार को एक ही वित्त वर्ष में करीब 123 करोड़ रुपये की सब्सिडी की बचत जिले से हुई है। यूरिया की खपत को कम करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर किसानों को उनकी जमीन की जरूरत के अनुसार यूरिया के उपयोग की सलाह दी। वहीं पीओएस (विक्रय बिंदु) प्रणाली के जरिए उर्वरक बिक्री की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की गई।
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मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल को पीओएस से जोड़ने से यह सुनिश्चित हुआ कि केवल पंजीकृत और वास्तविक किसान ही यूरिया खरीद सकें। आधार और भूमि सत्यापन की प्रक्रिया से अनधिकृत व थोक खरीद पर रोक लगी। डिजिटल निगरानी के चलते यूरिया की जरूरत से ज्यादा खरीद की तुरंत पहचान की गई, जिससे कालाबाजारी पर अंकुश लगा।
अब केवल वही किसान यूरिया प्राप्त कर सकता है, जो वास्तव में खेती कर रहा है। इसके अलावा किसानों में भी जागरूकता देखने को मिली है। इसलिए वह आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक का उपयोग कर रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. आदित्य डबास ने बताया कि यूरिया के दुरुपयोग और अवैध बिक्री पर प्रशासन ने सख्त रुख भी अपनाया।
इस दौरान 14 एफआईआर दर्ज की गईं। 6,845 यूरिया बैग जब्त किए गए और 30 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द किए गए। यह बदलाव केवल खपत कम होने का संकेत नहीं है, बल्कि यह उर्वरकों के विवेकपूर्ण और संतुलित उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम है। जिले में सूक्ष्म स्तर पर योजना बनाकर फसलवार उर्वरक आवश्यकताओं का आकलन किया गया। किसानों को व्यक्तिगत स्तर पर परामर्श दिया गया और संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक किया गया।
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यमुनानगर दूसरों के लिए उदाहरण बना : कृषि मंत्री

कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा का कहना है कि जिला प्रशासन की सख्त निगरानी, डिजिटल तकनीक और पारदर्शी वितरण प्रणाली के संयुक्त प्रभाव से यह उपलब्धि हासिल हुई है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि सब्सिडी वाला यूरिया केवल कृषि कार्यों में ही उपयोग हो। यमुनानगर का यह मॉडल अब अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बनकर उभरा है। एक ओर जहां सरकारी धन की बड़ी बचत हुई है, वहीं किसानों को समय पर और बिना परेशानी के खाद मिल रही है।
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