संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी की वार्डबंदी के ड्राफ्ट पर जगाधरी एसडीएम कार्यालय में अभी तक पांच सुझाव व ऐतराज पहुंचे हैं। इसके लिए अब आज व कल के दिन शेष हैं, यह देख कई पूर्व पार्षद प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनकी मानें तो वार्डबंदी के ड्राफ्ट पर सुझाव व ऐतराज के लिए दस दिन कम है, जिसे बढ़ाकर 21 दिन किया जाना चाहिए।
ड्राफ्ट में जगह-जगह प्रॉपर्टी आईडी होने से अभी तक आमजन तो दूर अधिकांश पूर्व पार्षद भी वार्डबंदी समझ नहीं पाए हैं, इसलिए सुझाव व ऐतराज देने की अवधि बढ़ानी चाहिए। पूर्व पार्षद अमरजीत सिंह कोहली, रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान ने बताया कि वार्डबंदी के ड्राफ्ट की प्रति गत सात दिसंबर को शनिवार के दिन नगर निगम यमुनानगर कार्यालय में चस्पाई जाने का सोमवार को पता चला।
ड्राफ्ट पर सुझाव व ऐतराज देने के लिए दो दिन यूं ही निकल गए। इसके बाद वार्डबंदी के ड्राफ्ट का आकलन करने पर पाया कि वार्डों के क्षेत्र व सीमाएं प्रॉपर्टी मालिक के नाम के स्थान पर जगह-जगह प्रॉपर्टी आईडी के जरिए समझाने का प्रयास किया गया है, पर अलग-अलग पोर्टल पर ऑनलाइन देखने का इन प्रॉपर्टी आईडी का ब्योरा नहीं मिला।
इस तरह से प्रॉपर्टी आईडी से वार्ड के क्षेत्र व सीमाएं आमजन तो दूर पूर्व पार्षदों के लिए समझने मुश्किल हो गए, जिस पर निगमायुक्त के संज्ञान में मामला लाया गया। साथ ही मांग की गई कि ड्राफ्ट में वार्डों के क्षेत्र व सीमाएं समझाने के लिए प्रॉपर्टी आईडी के स्थान पर प्रॉपर्टी मालिक का नाम दिया जाए, लेकिन यह मांग नजरअंदाज की जा रही है। साथ ही वार्डबंदी के ड्राफ्ट पर सुझाव व ऐतराज देने की अवधि 21 दिन की जानी चाहिए।
पूर्व पार्षदों ने कहा कि वार्डबंदी के ड्राफ्ट में जगह-जगह प्रॉपर्टी आईडी दी गई हैं। कौन सी प्रॉपर्टी आईडी वार्ड में किस क्षेत्र की है, यह समझ पाना आमजन तो दूर वार्ड के पूर्व पार्षदों के लिए भी कठिन है। इसी कारण अभी तक उन्हें यह नहीं पता लग पाया है कि उनके वार्ड में कौन-सा नया क्षेत्र शामिल किया गया और कौन-सा पुराना क्षेत्र किसी अन्य वार्ड में शामिल किया गया।
साथ ही वार्डों की सीमाएं कहां तक है, यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। ऐसे में वह निर्धारित समय में किस तरह वार्डबंदी के ड्राफ्ट पर आपत्तियां व सुझाव दे पाएंगे। इसलिए वार्डबंदी के ड्राफ्ट में संशोधन कर प्रॉपर्टी आईडी के साथ ही प्रॉपर्टी मालिक का नाम और आसपास के लैंडमार्क दिए जाने की मांग हैं, जिससे आमजन भी वार्डबंदी को आसानी से समझे और उस पर अपने आपत्तियां व सुझाव दे पाएं।