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नई रेल लाइन से पांच लाख लोगों को मिलेगा फायदा

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माई सिटी रिपोर्टर
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यमुनानगर। यमुनानगर-करनाल रेलवे लाइन को मंजूरी देने से जिले के लोगों में खुशी है। इससे जिले के करीब पांच लाख लोगों को फायदा मिलेगा। वहीं दामला और रादौर में रेलवे स्टेशन बनने से रोजाना करीब सात हजार यात्रियों के आवागमन करने का अनुमान है।
हरियाणा रेल अवसंरचना विकास निगम ने 883.78 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की इस डीपीआर को अंतिम रूप दिया है। यह परियोजना लगभग चार वर्ष की अवधि में पूरी होगी। प्रस्तावित करनाल-यमुनानगर नई रेल लाइन दिल्ली-अंबाला रेलवे लाइन पर करनाल रेलवे स्टेशन के पास से शुरू होगी और अंबाला-सहारनपुर रेलवे लाइन पर मौजूदा जगाधरी-वर्कशाप रेलवे स्टेशन से जुड़ेगी। यह नई लाइन पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेड कॉरिडोर के लिए एक फीडर मार्ग के रूप में कार्य करेगी, जिसमें यमुनानगर से सटे कलानौर स्टेशन पर रेलवे के साथ इंटरचेंज प्वाइंट प्रस्तावित है। इससे हरियाणा के सोनीपत, पानीपत, बहादुरगढ़ आदि के उद्योगों को देश के पूर्वी हिस्से तक सामान भिजवाना काफी आसान हो जाएगा। इंद्री, लाडवा और रादौर जैसे ग्रामीण क्षेत्रों से कृषि उपज, प्लाईवुड एवं लकड़ी, औद्योगिक उत्पादों, धातु उद्योग, उर्वरकों आदि के लिए बाजार तक त्वरित पहुंचना सुनिश्चित होगा। इसके अलावा यह परियोजना हरियाणा के दक्षिणी एवं पश्चिमी हिस्सों को सीधे हरिद्वार से जोड़ेगी।
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प्रस्तावित नई लाइन अंबाला-सहारनपुर रेलवे लाइन के जगाधरी वर्कशॉप रेलवे स्टेशन से शुरू होकर दिल्ली-अंबाला रेलवे लाइन पर करनाल व भैणी खुर्द रेलवे स्टेशन पर दोनों लाइनों को जोड़ेगी। इस लाइन पर जगाधरी वर्कशॉप के बाद दामला व रादौर दो स्टेशन यमुनानगर जिले में और लाडवा स्टेशन कुरुक्षेत्र जिले में होगा। जबकि करनाल जिले में इंद्री और रंभा रेलवे स्टेशन बनाएं जाएंगे। नई लाइन बनने के बाद यमुनानगर से रेल द्वारा हरियाणा के अन्य जिलों में जाना आसान हो जाएगा। अभी अंबाला होकर जाना पड़ता है। अभी करनाल-पानीपत की तरफ जाने के लिए सिर्फ रोडवेज की बसें ही सहारा हैं।
61 किमी में 116 पुल बनेंगे
हरियाणा रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड व रेलवे के 61 किलोमीटर लंबे इस संयुक्त प्रोजेक्ट पर डीपीआर के अनुसार लगभग 12 सौ करोड़ रुपए का खर्च आएगा। पूरी लाइन बिजली आधारित होगी। इसके लिए सरकार रेलवे को 574.98 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करके देगी। इस रास्ते में नहर, नाले व सड़कों को क्रॉस करने के लिए लगभग 116 पुल बनाए जाने का प्रस्ताव है।
फेस विनियर के उद्योगपति सुमित गुप्ता का कहना है कि अभी ट्रकों से माल मंगाने पर समय तो ज्यादा लगता ही है, बार-बार लोडिंग अनलोडिंग में डैमेज भी बढ़ जाता है। रेल लाइन से यमुनानगर-करनाल जुड़ने से उद्योगपतियों व व्यापारियों को लाभ होगा। शहर के उद्योगपति ये मांग उठाते रहे हैं। इस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनने के बाद इस लाइन का महत्व बढ़ जाएगा।
रणबीर सिंह का कहना है कि यमुनानगर व जगाधरी औद्योगिक शहर है। बर्तनों के लिए मेटल, एल्यूमीनियम समेत अन्य धातु के सामान के लिए कच्चा माल दिल्ली, राजस्थान, मुंबई से आता है। अभी दिल्ली तक तो यह सामान ट्रेन से आ जाता है। नई लाइन बनने पर यमुनानगर सीधे दिल्ली रेल लाइन से जुड़ जाएगा।
राजीव आर्य का कहना है कि इससे व्यापारियों को बड़ा लाभ होगा। प्लाईवुड के लिए भी कच्चा माल ट्रकों में लेकर आना पड़ता है। नई रेल लाइन बनने से माल दिल्ली पहुंचाना आसान हो जाएगा। इससे उनका ट्रांसपोर्टेशन का खर्च आधा हो जाएगा।
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राजकुमार शर्मा का कहना है कि करनाल-यमुनानगर क्षेत्र के कृषि व उद्योगों के लिए फायदेमंद साबित होगी। किसानों को अपनी फसल को दिल्ली व अन्य बड़े शहरों की मंडियों तक ले जाने में आसानी होगी। खासकर रादौर के टमाटर, शिमला मिर्च, मक्का व फूल आदि फसलों के उत्पादकों को फायदा पहुंचेगा।
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