यमुनानगर। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने यमुना पर बांध बनाने के अपने ड्रीम प्रोजेक्ट को प्रदेश के बजट में शामिल कर लिया है। प्रदेश के तीन करोड़ लोगों की प्यास बुझाने के लिए यह प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित होगा। साथ ही देश की राजधानी दिल्ली को भी अपने हिस्से का पूरा पानी मिल सकेगा। इस बांध से जहां सिंचाई के लिए किसानों की जरूरत पूरी होगी, वहीं जल पर आधारित हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की चारों इकाइयों को भी बिजली उत्पादन करने में लाभ मिलेगा। सिंचाई विभाग की तरफ से तैयार की गई रिपोर्ट में प्रथम चरण में इस प्रोजेक्ट पर तीन हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया है। इस डैम के बनने से मानसून के मौसम में यमुना के व्यर्थ बहने वाले पानी पर नियंत्रण पाया जा सकेगा। यह बांध कैचमेंट एरिया में हुई बारिश के 20.43 फीसदी पानी का भंडारण कर सकेगा।
पिछले साल मार्च महीने में मुख्यमंत्री ने हथिनीकुंड बैराज के अपस्ट्रीम पर पहला वाटर स्टोरेज डैम बनाने की संभावना तलाश करने के लिए साइट का दौरा किया था। तब उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सात किमी ऊपर हिमाचल की तरफ योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। इस प्रोजेक्ट के लिए जिले के गांव कलेसर, माधोबांस व बंजारा बांस के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के कई गांवों की जमीन का अधिग्रहण करने की संभावना जताई जा रही है। वहीं मुख्यमंत्री ने यमुना की सहायक नदी गिरि तथा टोंस पर बनने वाले रेणुका डैम, लखवाड डैम और किशाऊ डैम का भी बजट में जिक्र करते हुए कहा है कि हरियाणा सरकार इनके निर्माण की बड़े स्तर पर पैरवी कर रही है। इनके कुल पानी से 47 फीसदी हिस्सा अकेले हरियाणा को मिलेगा। तीनों बांध परियोजनाओं की कुल लागत का 90 फीसदी केंद्र और 10 फीसदी राज्य खर्च करेंगे।
ऐसे समझें पानी का गणित
-बरसात के सीजन में करीब एक महीने औसतन प्रति सैकेंड 50 हजार से एक लाख क्यूसेक पानी हथिनीकुंड में पहुंचता है। इस औसत से हिसाब लगाएं तो प्रतिदिन कई अरब लीटर पानी व्यर्थ जाता है। पब्लिक हेल्थ विभाग के एक्सईएन पारीक गर्ग के मुताबिक प्रदेश के शहरी क्षेत्र में प्रतिदिन एक व्यक्ति को 155 लीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 55 लीटर पानी खर्च करने के लिए वितरित किया जाता है। ऐसे में तीन करोड़ आबादी की बात करें तो प्रतिदिन 300 से 400 करोड़ लीटर पानी ही प्रयोग किया जाता है। जबकि यमुना का बरसात के सीजन में केवल दो महीने के पानी का स्टॉक कर लिया जाए तो घरेलू प्रयोग के लिए बाकी बचे 10 महीने का कोटा हो पूरा हो सकता है।
यमुना पर पहला बांध होगा
यमुना नदी पर अभी तक कोई भी वाटर स्टोरेज डैम नहीं बनाया गया है। जिसकी वजह से मानसून के समय में यमुना नदी उफान पर आ जाती है और प्रतिदिन कई लाख क्यूसेक पानी बिना इस्तेमाल के व्यर्थ बह जाता है। बैराज से निकले अत्यधिक पानी की वजह से हर बार हरियाणा के साथ-साथ दिल्ली में भी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस योजना को कारगर रूप देने के लिए हिमाचल, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के साथ संयुक्त रूप से यमुना रिवर बोर्ड बनाकर इसे अमल में लाने का प्रोजेक्ट है।
इन परियोजनाओं का भी बजट में जिक्र
किशाऊ बांध-यमुना की सहायक नदी टोंस पर किशाऊ बांध परियोजना का निर्माण होना है। यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध होगा। इस डैम के निर्माण की लागत 10 हजार 500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह 236 मीटर ऊंचा और 680 मीटर लंबा होगा, जिससे करीब 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।
रेणुका बांध-सिरमौर जिले में रेणुकाजी में 148 मीटर ऊंचा डैम बनना है। इसमें 40 मेगावाट बिजली तैयार की जाएगी। इस परियोजना की लागत 4557 करोड़ रुपये है।
लखवाड़ बांध-इस बहुउद्देशीय परियोजना के लिए एमओयू पहले ही हो चुका है। यह बांध परियोजना 1987 में शुरू हुई थी। करार के तहत सालाना यमुना नदी के 11.983 अरब घन मीटर पानी से पांच राज्यों के बीच बंटवारा होना है। परियोजना की कुल लागत 3966.51 करोड़ रुपये आंकी गई है।
-पानी की कमी पूरी हो जाएगी
-लंबे समय तक यमुनानगर में काम कर चुके सिंचाई विभाग की यमुना जल सेवाएं के एक्सईएन हरिदेव कांबोज का कहना है कि यह काफी बड़ा प्रोजेक्ट है और इसको पूरा होने में कई साल लगेंगे, लेकिन इसके बहुत फायदे हरियाणा को मिलेंगे। उन्होंने बताया कि बांध बनने के बाद स्टोर किए गए पानी से प्रदेश में पेयजल की समस्या खत्म हो जाएगी। बाकी बचे दिनों में आने वाले पानी से दैनिक जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि यमुना और उसकी सहायक नदियों पर प्रस्तावित सभी प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद इतना पानी होगा कि हरियाणा और दिल्ली में अगले 50 वर्ष तक पानी खत्म नहीं होगा।