यमुनानगर। धरा पर विलुप्त हो चुकी वैदिक कालीन सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ही हरियाणा और हिमाचल की सीमा पर बांध (डैम) बनाने की बड़ी परियोजना है। आदि बद्री बांध हिमाचल की 31.66 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जाना है।
बांध के पानी को स्टोरेज करने के लिए सोम सरस्वती बैराज बनाया जाएगा। वहीं, हरियाणा और हिमाचल के लिए राहत की बात ये बैराज की क्षमता मापने के लिए जो अंतिम प्लेट लोड परीक्षण किया गया था वह भी सफल हो गया। इसका दिल्ली की टीएसएसएमआरएस टीम ने टेस्ट किया है। अब जल्द ही बैराज का डिजाइन भी मिल जाएगा।
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ऐसे में बैराज बनने के बाद जल्द ही सरस्वती की धारा भी धरा पर प्रवाहित होगी। बता दें कि आदिबद्री बांध हिमाचल की शिवालिक की पहाड़ियों को चीर कर निकल रही सरस्वती नदी के ऊपर बनाया जाना है। इसी तरह डैम से ढाई किमी. नीचे सोम सरस्वती नदी पर गांव काठगढ़ में बैराज बनाया जाएगा। इस बांध को बनाने का कार्य हिमाचल की एचपीसीएल (हिमाचल पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के जरिए किया जाना है।
150 टन भार डाल कर देखा गया
बता दें टीम ने बैराज स्थल पर प्लेट लोड परीक्षण नदी तल से 20 फीट की गहराई पर किया गया। इस परीक्षण में लगभग 150 टन भार डाल कर देखा गया। दरअसल, किसी भी बैराज को बनाने से पहले प्लेट लोड परीक्षण किया जाता है। मतलब, परीक्षण भूमि की कितनी भार वहन करने की क्षमता है, इसका पता लगाता है। यह परीक्षण यह भी बताता है कि नींव पर कितना भार लगाया जा सकता है जिससे वह सुरक्षित रहे।
बैराज स्थल पर इससे पहले दो उप स्तरीय प्रतिक्रिया गुणांक व इन-सिटू घनत्व परीक्षण किए जा चुके हैं लेकिन प्लेट लोड परीक्षण बैराज स्थल का अंतिम परीक्षण था। उल्लेखनीय है आदिबद्री बांध परियोजना को लेकर चंडीगढ़ में 21 जनवरी 2022 में हरियाणा-हिमाचल के बीच में समझौता (एमओयू) हुआ था।
198 किमी बहेगी सरस्वती नदी
आदिबद्री बांध बनने के बाद सरस्वती नदी का जल हरियाणा में 198 किलोमीटर तक निरंतर प्रवाहित होगा। जल यमुनानगर, कुरुक्षेत्र व कैथल के एरिया से बहकर पंजाब के पटियाला के सतड़ाना के पास घग्गर नदी में मिलेगी। परियोजना के अनुसार आदिबद्री बांध हिमाचल की 31.66 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जाएगा। इस बांध की चौड़ाई 101.06 मीटर व ऊंचाई 20.5 मीटर होगी और बांध में हर साल 224.58 हेक्टेयर मीटर पानी का स्टोरेज होगा। 61.88 हेक्टेयर मीटर पानी हिमाचल व शेष करीब 162 हेक्टेयर मीटर पानी हरियाणा को मिलेगा। वहीं बांध के बनने से आदिबद्री से निकल रही सरस्वती नदी में हमेशा जल प्रवाहित होगा।
सरस्वती में हमारी श्रद्धा है। इसकी धरा को प्रवाहित करने के लिए हम दिन रात कार्य कर रहे हैं। आदिबद्री में बनने वाले बैराज के लिए हम तीनों परीक्षण कर चुके हैं। इनमें प्लेट लोड टेस्ट एक था जोकि सफल रहा।
धुमन सिंह किरमिच, उपाध्यक्ष, हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड।