नागपंचमी का त्यौहार आज है। इस साल यह पंचमी सोमवार को पड़ी है। जिससे ज्योतिषी इसे विशेष मान रहे हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि सोमवार को नाग की पूजा कई दोषों से मुक्ति देगी। इस बार यह महासंयोग 125 साल बाद बन रहा है।
दरअसल सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। वहीं नाग को भगवान शिव का आभूषण कहा जाता है। मान्यता है कि नागपंचमी में विधिवत नाग देवता की पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। वहीं नाग भय, नाग छाया, कालसर्प दोष आदि दशाओं से भी मुक्ति मिलती है। नाग पंचमी श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है।
दुर्लभ महासंयोग बना : बूड़िया निवासी पंडित ललित शर्मा ने बताया कि 20 साल बाद नाग पंचमी सावन में आई है। सावन के तीसरे सोमवार को पंचमी तिथि 125 साल बाद आ रही है। जो स्वत: दुर्लभ महासंयोग है। नाग पंचमी का दिन सोमवार को होने से इसका महत्व बढ़ जाता है। वहीं सावन का तीसरा सोमवार श्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक माना जाता है। चूंकि इसे भागवान शिव का अंक माना जाता है। तीसरा सोमवार अद्भुत मुहूर्त में आ रहा है। इस दिन संजीवनी महायोग बनेगा। सावन के महीने में सोमवार के दिन नाग पंचमी का संयोग बहुत ही दुर्लभ होता है। इस दिन पूर्णा तिथि है, सोम का नक्षत्र हस्त भी विद्यमान है और सिद्धि योग के साथ-साथ वर्ष की श्रेष्ठ पंचमी यानी नाग पंचमी भी है।
कालसर्प दोष व छाया से मिलेगी मुक्ति : पंडित श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागदेवता की पूजा करने की मान्यता है। सागर मंथन के समय से नाग देवता की परंपरा चली आ रही है। उन्होंने बताया कि इस दिन कालसर्प दोष के जातक व सर्प छाया दोष के जातक के लिए यह बहुत शुभ संयोग है। इस संयोग में पूजा करके जातक कालसर्प दोष व सर्प छाया दोष से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने बताया कि नाग भगवान शिव के आभूषणों में एक है। इस दिन शिव का रुद्राभिषेक करने और कालसर्प दोष का पूजन का शुभ योग माना जाता है। नाग पंचमी शुभ मुहूर्त 4 अगस्त को पंचमी तिथि शाम 6.48 बजे शुरू होगी और 5 अगस्त दोपहर 2.52 बजे तक रहेगी। 5 अगस्त के दिन नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त सुबह 5:49 से 8:28 के बीच रहेगा।