दीपेंद्र कुमार
यमुनानगर। यूपी के पीलीभीत में बीकेआई के तीन आतंकी मुठभेड़ में ढेर होने के बाद शुरू हुई जांच की आंच यमुनानगर तक पहुंच गई है। एनआईए की जांच में यमुनानगर के खारवन गांव निवासी कुलबीर सिंह उर्फ सिद्धू का नाम सामने आया है। कुलबीर के परिवार वाले भी इस जानकारी से सकते में हैं। उनके पिता का कहना है कि वह बेटे को आईपीएस बनाने का सपना देख रहे थे, लेकिन वह आतंक के दलदल में फंस गया। पीलीभीत प्रकरण में कुलदीप का नाम सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने भी उनके घर पर पहुंच कर जांच की।
जानकारी के अनुसार कुलबीर सिंह थाना सदर जगाधरी के खारवन गांव का रहने वाला है। कुलदीप के पिता सुखविंद्र सिंह का कहना है कि वर्ष 2017 में कुलदीप 17 साल की उम्र में अर्मेनिया गया था। उस समय उसने कुछ नहीं बताया था। इसके बाद वह वापस नहीं आया। न ही आज तक उससे कोई संपर्क नहीं हुआ है। वह कहां पर किस तरीके से गलत हाथों में फंस गया इसका कुछ पता नहीं चला। पिता का कहना है कि उन्होंने पीलीभीत का नाम तक नहीं सुना है। पिता का कहना है कि वह उसकी हरकत से परेशान हो चुके हैं। कभी एनआईए की टीम पूछताछ करती है तो कभी कोई पुलिस आती है। उनका कहना है कि वह अपने बेटे को बड़ा अफसर बनाना चाहते थे। उनका सपना था कि कुलबीर आईपीएस अफसर बने पर वह गलत हाथों में पड़कर आतंक के दलदल में फंस गया।
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परिवार ने कर दिया था बेदखल
कुलबीर की गतिविधियों के कारण परिवार को काफी कुछ झेलना पड़ा है। जिस कारण परिवार ने उससे पूरी तरह से नाता तोड़ लिया था। परिजनों ने करीब छह साल पहले उसे घर से बेदखल भी कर दिया था।
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एनआईए ने गिरफ्तारी पर रखा 10 लाख का इनाम
पीलीभीत में हुई मुठभेड़ के बब्बर खालसा इंटरनेशनल के तीन आतंकी मुठभेड़ में मारे गए थे। एनआईए की टीम इस मामले की जांच कर रही है। जांच में पता चला है कि बीकेआई के आतंकी कुलबीर सिंह उर्फ सिद्धू का इस प्रकरण में अहम रोल है। वह इंग्लैंड से ही फोन पर आतंकियों निर्देश देता रहा। पंजाब में विहिप नेता की हत्या के बाद एनआईए ने कुलबीर सिंह उर्फ सिद्धू की गिरफ्तारी पर 10 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था।
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वर्जन
-कुलबीर सिंह की लगातार निगरानी चल रही है। जिस कारण शनिवार को भी उसके घर पर पहुंचकर परिजनों ने बात की गई थी। परिवार को उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
-तरसेम सिंह, एसएचओ सदर थाना जगाधरी यमुनानगर।