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पिता-पुत्र ने रक्त देकर बचाई मरीज की जान

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रक्तदान करते पिता पुत्र। संवाद - फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। मानव सेवा से बड़ी कोई पूजा नहीं होती है। यदि व्यक्ति किसी को जीवन दान दे सकता है तो वह सभी प्रकार के पूजन व वैदिक कर्मों का फल पाता है। ऐसी ही मिसाल शहर निवासी पिता-पुत्र ने दी है। नवरात्र के व्रत रखके बावजूद पिता-पुत्र निजी अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे मरीज को रक्त देकर उसकी जान बचाई।
पीड़ित गौतम अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में भर्ती थे। उन्हें एबी पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता थी। यह ग्रुप रक्तकोष में नहीं मिला। ऐसे में शहीद ऊधम सिंह रक्तकोष ने स्माइल फाउंडेशन संस्था को इसकी सूचना दी। संस्था के सोशल मीडिया ग्रुप पर इसकी जानकारी दी। स्माइल फाउंडेशन के अध्यक्ष संजीव मेहता ने बताया कि गौतम अस्पताल में भर्ती मरीज की हालत गंभीर है।
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मरीज को एबी पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता थी। उन्होंने संस्था के ग्रुप में आपातकाल का मैसेज छोड़ दिया। कुछ ही देर में संस्था के सक्रिय रक्तदाता राजेश महाजन और उनका बेटा राहुल महाजन रक्तदान के लिए पहुंच गए। दोनों ने नवरात्र का व्रत कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने मानवता की मिसाल पेश की और रक्तदान किया।
उल्लेखनीय है कि रक्तदान कभी खाली पेट नहीं किया जा सकता है। व्रत में भी राजेश और राहुल ने जिंदगी और मौत से जूझ रहे व्यक्ति के लिए रक्तदान किया। समय पर रक्त मिलने पर उसकी जान बच गई। राजेश कुमार ने कहा कि मानव सेवा से बड़ा न कोई धर्म है और न ही कोई पूजा है। किसी को जीवनदान देना ही ईश्वर की सच्ची आराधना है। राजेश महाजन का यह 60वां रक्तदान है। उनके बेटे राहुल महाजन ने 10वीं बार रक्तदान किया है।
राहुल महाजन ने बताया कि उसे रक्तदान करने की प्रेरणा अपने पिता और स्माइल फाउंडेशन से जुड़कर मिली। राहुल महाजन ने कहा कि हमें नियमित रूप से हर तीन महीने बाद रक्तदान जरूर करना चाहिए। संस्था अध्यक्ष संजीव मेहता ने बताया कि संस्था आठ साल से देशभर में थैलेसीमिया बच्चों के लिए शिविर लगाकर रक्त उपलब्ध करवा रही है।
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कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप से हर कोई भयभीत है। कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए प्लाज्मा नहीं मिल रहा। संस्था हर संभव प्रयास करने की कोशिश कर रही है कि प्लाज्मा की व्यवस्था करके मरीजों का जीवन बचाया जा सके।
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