संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कृषि विज्ञान केंद्र दामला की ओर से तपडापुर गांव में धान में एकीकृत खरपतवार प्रबंधन विषय पर किसान गोष्ठी हुई। केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने किसानों को खरपतवार प्रबंधन की जानकारी दी।
डॉ. रावल ने किसानों को बताया कि धान लगाने के बाद खेत को जून में गहरी जुताई कर खुला छोड़ें। इससे कुछ मात्रा में खरपतवार के बीज नष्ट हो जाते हैं। उसके बाद खेत में पलेवा कर दें और खरपतवारों के बीजों को अंकुरित होने दें। जब खरपतवार के बीज अंकुरित हो जाएं तो उन्हें बीज बनने से पहले हैरो या रोटावेटर चलाकर खेत में ही मिला दें। इससे यह हरि खाद का कार्य करेंगे।
यदि धान की सीधी बिजाई करनी है तो खरपतवारनाशी का तुरंत छिड़काव करें। यदि धान की रोपाई परंपरागत प्रणाली से की गई है तो रोपाई के तुरंत बाद खरपतवार नाशक का छिड़काव करें। बीज की मात्रा या रोपाई में पौधे से पौधे व पंक्ति से पंक्ति की दूरी कम रखने से भी खरपतवार को प्रतिस्पर्धा से उनकी बढ़वार को कम किया जा सकता है।
यदि इसके बाद भी खरपतवार खेत में हो जाएं तो चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार व सकरी पत्ती वाले खरपतवार को देखते हुए खरपतवारनाशी का छिड़काव करने की सलाह दी। कृषि अधिकारी या विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही रासायनिक दवा का छिड़काव करें। यदि 30 से 35 दिन बाद खेत में खरपतवार दिखाई दे तो खरपतवारों को हाथ से निकलकर नष्ट करें। रासायनिक दवा का छिड़काव इस अवस्था में बिल्कुल भी न करें।
मृदा विशेषज्ञ डॉ. विशाल गोयल ने धान में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जानकारी दी और बताया कि धान की अच्छी पैदावार के लिए कौन-कौन से पोषक तत्वों की पौधों के लिए आवश्यकता होती है। प्रशिक्षण सहायक डॉ. करण सिंह सैनी ने भी रसायन मुक्त व जैविक विधि से सब्जियां लगाने की सलाह दी।