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Yamuna Nagar News: धान की रोपाई करने के लिए खेतों में उतरे किसान-मजदूर

Mon, 15 Jun 2026 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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जगाधरी क्षेत्र के खेतों में की गई धान की रोपाई। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिले में किसान आधिकारिक तौर पर सोमवार से धान की रोपाई शुरू कर सकेंगे। 15 जून तक लागू प्रतिबंध समाप्त होने के साथ ही खेतों में धान रोपाई का कार्य तेज होने की संभावना है। धान की पौध पहले ही तैयार हो चुकी है और किसान ट्रैक्टरों तथा अन्य कृषि उपकरणों के साथ खेतों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
जिलेभर में खेतों में हलचल बढ़ गई है और किसान रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं। हालांकि, इस बार कई किसानों ने निर्धारित तिथि से पहले ही धान की रोपाई शुरू कर दी थी। पिछले दिनों लगातार हुई बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी आ गई, जिसका लाभ उठाते हुए किसानों ने सप्ताहभर पहले ही कई क्षेत्रों में धान लगाना शुरू कर दिया। बारिश के कारण खेतों की तैयारी आसान हुई और सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च भी नहीं करना पड़ा।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने इस वर्ष जिले में करीब 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र से कम में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया है। विभाग की प्राथमिकता परंपरागत रोपाई के बजाय धान की सीधी बिजाई को बढ़ावा देना है, ताकि भूजल संरक्षण के साथ खेती की लागत को कम किया जा सके। इसके लिए सरकार किसानों को सब्सिडी भी उपलब्ध करा रही है।
कृषि विज्ञान केंद्र दामला के समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने बताया कि धान रोपाई की अभी केवल शुरुआत है और किसानों के पास पर्याप्त समय उपलब्ध है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि जल्दबाजी करने के बजाय जुलाई माह में रोपाई करना अधिक लाभदायक हो सकता है, क्योंकि उस समय मानसून अपने चरम पर होता है और पानी की उपलब्धता बेहतर रहती है।
उन्होंने बताया कि परंपरागत रोपाई की तुलना में सीधी बिजाई में पानी की खपत कम होती है तथा पौधों की जड़ें अधिक मजबूत विकसित होती हैं, जिससे उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है। डॉ. रावल के अनुसार समय से पहले रोपाई करने पर पौधों का विकास प्रभावित हो सकता है और किसानों को अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पाता। इसलिए मौसम, मिट्टी और जल उपलब्धता को ध्यान में रखकर ही खेती संबंधी निर्णय लेने चाहिए।
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किसान बारिश के दिनों में रोपाई को प्राथमिकता दें, जिससे सिंचाई पर खर्च कम होगा और फसल को पर्याप्त नमी मिल सकेगी। सही समय और वैज्ञानिक विधि से की गई खेती ही अधिक लाभ दिला सकती है। - डॉ. आदित्य डबास, उपनिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग।
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