संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में रविवार को साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुयशा भारती ने प्रवचन किया। उन्होंने दशहरा मनाने के आध्यात्मिक कारणों व रहस्यों के बारे बताया। उन्होंने कहा कि त्रेता युग में श्रीराम ने रावण का वध किया था। इसके बाद से विजयादशमी का त्योहार मनाया जाता है।
हर वर्ष बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाने के लिए रावण के पुतलों को जलाया जाता है। यदि हम इस घटना पर आत्ममंथन करें तो कदाचित इस पर्व के पीछे रहस्य को जान सकेंगे। हम इस क्षण भंगुर मानव जीवन में मानवीय गुणों का विस्तार कर पाएंगे। त्रेता युग में केवल एक रावण था, जिसे समाप्त करने के लिए परमात्मा को श्रीराम का अवतार धारण करना पड़ा था।
घोर कलियुग में प्रत्येक मन के भीतर एक रावण बैठा है। अनुकूल परिस्थिति मिलने पर वह रावण बाहर प्रकट हो जाता है। तभी आज समाज में इतने कुकृत्य हो रहे हैं। स्वयं मानव ही मानवता का हरण कर रहा है। इसलिए हर मनुष्य को अपने मन में श्रीराम को प्रकट करने की आवश्यकता है, जो मन में बैठे रावण का वध कर पुनः मानवता का विकास करे। परंतु यह तभी संभव है, जब हम इस पर विचार करें और आत्मसात करें।
उन्होंने कहा कि आशुतोष महाराज ने कहा हैं कि ब्रह्मज्ञान से ही मन का रूपांतरण संभव है। ब्रह्मज्ञान से ही मन में शांति और जीवन में क्रांति आ सकती है। ब्रह्मज्ञान की ध्यान साधना से हम अपने अंतःकरण में परमात्मा के दिव्य प्रकाश स्वरूप में दर्शन करते हैं, तो मन के विकार सहज ही समाप्त हो जाते हैं। सत्संग के दौरान साध्वियों ने भजनों से गुरु और भगवान की महिमा का गुणगान किया।