संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा माॅडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 36वें दिन डॉ. स्वाति महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि जीवन में भावना का बड़ा महत्व है। हम जो भी कार्य करते हैं, उसकी पृष्ठभूमि में अच्छी और बुरी भावना छिपी होती है। हमारा दान-पुण्य, जप-तप व सेवा तभी सार्थक व सफल होंगे, जब हमारी भावनाएं शुद्ध व पवित्र होंगी।
बिना श्रद्धा व भावना के हमें कुछ भी प्राप्त नहीं होता। साध्वी ने कहा कि यदि भावना अच्छी है तो ईश्वर मिलेंगे अन्यथा कुछ नहीं मिलेगा। याद करो शबरी की पुकार को। क्या था शबरी के पास, ना धन, ना दौलत, ना पद, ना प्रतिष्ठा। कुछ भी नहीं था, पर सिर्फ उसके पास एक अमूल्य वस्तु थी। वह थी भावना।
शबरी ने भावनाओं में भरकर श्रीराम को पुकारा और श्री राम प्रभु उसकी कुटिया में चले गए। चंदना ने प्रभु महावीर को श्रद्धा से पुकारा तो महावीर प्रभु उसके द्वारा पर पहुंच गए। कहने का तात्पर्य है कि भावों में बड़ी ताकत होती है। अच्छी भावना हमारे लिए आत्म कल्याण के द्वार खोल देती है।