दो साल से खाली पड़े सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों पर सोमवार को भाजपा का कब्जा हो गया। नगर निगम सभाकक्ष में भले ही प्रवीण शर्मा उर्फ पिन्नी और रानी कालड़ा को औपचारिक प्रक्रिया के बाद चुन लिया गया हो। आधे घंटे में चुने गए दोनों जनप्रतिनिधियों को लेकर भाजपा में टॉप से बॉटम लेवल गतिविधियां चल रही थीं। चुनाव प्रक्रिया के बाद सोमवार को इनके और उनके दौड़ में शामिल होने और करीब होने जैसी सभी अटकलों पर विराम लग गया।
सभाकक्ष में जब दोनों प्रत्याशियों के नामों की घोषणा हुई और विपक्षी सहित अपनों ने कोई आपत्ति नहीं जताई तो भाजपा नेताओं को राहत मिली। चूंकि भाजपा को विपक्षी की असहमति से ज्यादा अपनों की आपत्ति का डर था। चूंकि इन दोनों पदों के एक दो नहीं भाजपा के सभी पार्षद अपनी दावेदारी ठोक चुके थे। वहीं नगर निगम चुनाव के बाद से प्रवीण शर्मा का नाम शुरुआत से ही दोनों पदों की दावेदारी में आगे था। लेकिन रानी कालड़ा का नाम दूर दूर तक नहीं था। रानी कालड़ा को भाजपा प्रत्याशी बनाने से अन्य दावेदारी जताने वालों भी धक्का लगा, लेकिन दोनों नामों की घोषणा पहले ही पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा कर दी गई थी।
सोमवार को नगर निगम के सभागार में भले ही मामूली और साधारण तरीके से सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुने गए हो, लेकिन इसके भाजपा खेमे में काफी हलचल रही। अपनों का विरोध न हो इसके लिए चुनाव से पहले पार्टी के कार्यालय में सभी पार्षदों को बुलाया लिया गया था। चूंकि भाजपा के पास बहुमत होने के कारण विपक्ष की असहमति से फर्क नहीं पड़ता था, लेकिन अपना कोई नाराज होकर आपत्ति करे इसलिए पहले ही सभी को बुला लिया गया। जगाधरी रेस्ट हाउस रोड स्थित पार्टी कार्यालय में शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर, विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, भाजपा चुनाव पर्यवेक्षक वेदपाल, पूर्व राज्यमंत्री कर्णदेव कांबोज, रामनिवास गर्ग सहित अन्य उपस्थित रहे। भाजपा की यह बैठक इतनी गोपनीय रही कि इसकी न फोटोग्राफी और न ही वीडियो ग्राफी की गई। वहीं यह बैठक भाजपा ने अपने फेसबुक पेज पर भी नहीं अपलोड करने के लिए भी फोटो नहीं कार्रवाई।
पार्टी कार्यालय में भाजपा के सभी 15 पार्षदों को बुला लिया गया था। यहां सभी पदाधिकारियों व नेताओं ने पार्षदों से बात की और उन्हें चुनाव प्रक्रिया के बारे समझाया। इसके बाद चुनाव पर्यवेक्षक वेदपाल ने सभी पार्षद से अकेले में अलग से बात की। भीतरी सूत्रों के मुताबिक सभी को अपनी पार्टी के किसी प्रत्याशी के नाम का विरोध न करने के लिए कहा गया। चूंकि पार्टी को पहले से ही अंदेशा था इस प्रक्रिया में अपनों का ही विरोध झेलना पड़ सकता है। सभी से बात के दोनों प्रत्याशियों के नाम फाइनल कर दिए गए। पार्षदों का मन भांपने के बाद पदाधिकारियों ने राहत की सांस ली।