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बिजली निगम के फर्जीवाड़े में ईडी की एंट्री, कब्जे में लिया रिकॉर्ड

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यमुनानगर। बिजली निगम में हुए करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मामले की जांच अब ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) को सौंपी गई है। फर्जीवाड़े में अधिकारियों और कर्मचारियों ने कितनी संपत्ति बनाई है इसकी जांच ईडी करेगी। इसके लिए ईडी ने बिजली निगम के एसई कार्यालय से संबंधित रिकॉर्ड कब्जे में लिया है।
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विदित हो कि बिजली निगम द्वारा जगाधरी डिवीजन का वर्ष 2018 से 2022 तक का ऑडिट कराया गया है, जिसमें करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच में पता चला है कि फर्जीवाड़ा करने वाले कर्मचारियों ने राशि जानकारों के खातों में जमा कराई थी, जिनका बिजली निगम से कोई संबंध नहीं था। जिन लोगों के खातों में रुपये जमा होते थे, उन्हें थोड़ा बहुत कमीशन देकर रुपये खुद हड़प लिए जाते थे। गड़बड़ी सामने आने के बाद अब बिजली निगम 2016-17 व 2017-18 का भी ऑडिट करवा रहा है।
मामले की जांच कर रही पानीपत की सीआईए-टू टीम ने इस फर्जीवाड़े में 16 जून को बिजली निगम यमुनानगर के एक्सईएन कुलवंत सिंह और छछरौली सब डिवीजन के लाइनमैन सोनू को गिरफ्तार किया था। वहीं इससे पहले भी कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह जांच ईडी को सौंपी गई है। माना जा रहा है कि ईडी केस से जुड़े कर्मचारियों की संपत्ति भी अटैच कर सकती है। बिजली निगम के एसई राजेंद्र कुमार का कहना है कि ईडी ने जांच के लिए कार्यालय से रिकॉर्ड मांगा था जो उन्हें दे दिया गया है।
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अधिकारियों और कर्मचारियों से हो चुकी लाखों की रिकवरी
अभी तक की जांच में बिजली निगम के एलडीसी राघव वधावन, एएलएम मनहर गोपाल, डिविजनल अकाउंटेंट योेगेश लांबा, शैफाली, अकाउंटेंट पूजा गेरा, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट जगमाल सिंह, एक्सईएन बिलासपुर नीरज कुमार, एक्सईएन कुलवंत सिंह व सेवानिवृत्त जगाधरी एक्सईएन संजीव गुप्ता का नाम सामने आया है। पानीपत की सीआइए-टू ने आरोपी एक्सईएन कुलवंत सिंह से 40 लाख रुपये, एलडीसी राघव वधावन से 75 लाख रुपये, पौने दो किलोग्राम से अधिक गहने और कार बरामद की है। आरोप है कि राघव ने अपनी पत्नी के नाम भी इसी राशि से प्लॉट व दुकान खरीदी है। इसी तरह अकाउंटेंट पूजा गेरा से 35 लाख रुपये की रिकवरी हो चुकी है। योगेश लांबा और राघव वधावन को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। तीन अन्य कर्मचारियों से भी पुलिस ने 10 लाख रुपये रिकवर किए हैं।
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गलत मैसेज जाने से खुला था घोटाला
पानीपत के गांव समालखा निवासी टैक्सी चालक के बैंक खाते में बिजली निगम के खाते से रुपये जमा होने का मैसेज आने के बाद मामले का खुलासा हुआ था। बिजली निगम के कर्मचारियों को जब इसका पता चला तो वह टैक्सी चालक से रुपये वापस लेने पहुंचे। चालक को कुछ शक हुआ तो उसने पानीपत थाने में शिकायत दी। थाने से जांच पानीपत सीआईए-टू को दी गई। जांच में पता चला कि बिलासपुर डिवीजन से रुपये चालक के खाते में जमा हुए थे, जिसके बाद पुलिस जांच करते हुए यमुनानगर पहुंची।
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