संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। डेरा हड़तान गांव में संत पूर्णदास के सानिध्य में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज के 650वीं जयंती और डेरा के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में वार्षिक संत समागम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि डेरा कपालमोचन से संत निर्मलदास ने श्रद्धालुओं से संत रविदास की शिक्षाओं से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि संतों की शिक्षाएं केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव और मानवता की सेवा का संदेश भी देती हैं। संत रविदास जी के विचारों को जीवन में अपनाकर ही सामाजिक समरसता और भाईचारे को और मजबूत किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शनकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
विशिष्ट अतिथि उप जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला परियोजना अधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान, यमुनानगर केएस संधावा ने कहा कि संत गुरु रविदास जी महाराज ने सदियों पहले जातिगत भेदभाव, ऊंच-नीच और छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई। उन्होंने समानता, मानव गरिमा और सामाजिक समरसता का संदेश देकर ऐसे समाज की कल्पना की, जहां प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान और अधिकार मिलें।
उन्होंने कहा कि संत रविदास की शिक्षाएं आज भी सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए प्रासंगिक हैं। उनकी अवधारणा ऐसे समाज का प्रतीक है, जहां दुख, भय, भेदभाव और शोषण के लिए कोई स्थान न हो। यह विचारधारा आपसी भाईचारे और समानता को मजबूत करने की प्रेरणा देती है। संधावा ने कहा कि भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के सिद्धांतों को आगे बढ़ाया। भारतीय संविधान में निहित ये मूल्य समतामूलक समाज के निर्माण का आधार हैं।