संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। रात में ट्रेनों की सामान्य बोगियों में दरवाजे न खुलने के कारण यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ठंड के मौसम में तो यात्रियों की परेशानी दोगुनी हो जाती है। गुरुवार रात यमुनानगर-जगाधरी स्टेशन पर कुछ ऐसा ही कुछ देखने में आया। रात 11.30 से 12 बजे के बीच आईं तीन ट्रेनों की सामान्य बोगियों के दरवाजे यात्रियों के उतरने के लिए तो चंद सेकेंड खुले, पर प्लेटफॉर्म से अन्य यात्रियों के ट्रेनों में चढ़ने से पहले ही अंदर से बंद कर दिए गए। ये देख सामान सिर पर उठाए प्लेटफॉर्म पर महिलाएं, बच्चे व अन्य लोग एक के बाद एक बंद पड़े सामान्य बोगियों के दरवाजे पीटते रहे, पर न अंदर से यात्रियों ने न दरवाजे खोले न खुलवाने में रेलवे पुलिस आगे आई। ऐसे ही सामने से तीन ट्रेनें निकल जाने के बाद भी उनमें प्लेटफॉर्म पर मौजूद आधे लोग चढ़ने से रह गए, जो स्टेशन का वेटिंग रूम बंद होने के कारण न्यूनतम पांच डिग्री सेल्सियस व सर्द हवाओं के बीच कंपकंपी में प्लेटफॉर्म पर ही इंतजार करने पर मजबूर हुए।
अलर्ट के बाद भी पूरे स्टेशन पर दिखे दो ही जीआरपी कर्मी-
यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन को बम से उड़ाने की धमकी के कई बार पत्र मिल चुके हैं। ऐसा ही धमकी भरा पत्र गत अक्तूबर माह में भी मिला। इसके बाद से स्टेशन पर रेलवे पुलिस अलर्ट पर होने के दावे हैं। दिन में तो जीआरपी के विशेष तलाशी अभियान चल रहे हैं, पर रात में सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए अमर उजाला टीम गुरुवार रात स्टेशन पर पहुंची। इस दौरान रात 11.30 से 12.30 के बीच पूरे स्टेशन पर दो ही जीआरपी कर्मी दिखे, पर उनकी भी ट्रेनों के बंद पड़े सामान्य बोगियों के दरवाजे खुलवाने में दिलचस्पी नहीं दिखी। 11 बजकर 26 मिनट पर प्लेटफॉर्म नंबर दो पर फिरोजपुर-धनबाद गंगा सतलुज एक्सप्रेस, 11 बजकर 39 मिनट पर अमृतसर-मुंबई गोल्डन टैंपल मेल व करीब 12 बजे अमृतसर-बिलासपुर छतीसगढ़ एक्सप्रेस रुकी। तीनों ट्रेनों के सामान्य बोगियों के दरवाजे अंदर से उतरने वाले यात्रियों के लिए जरूर खुले, पर उनके उतरते ही अंदर से बंद कर लिए गए। ऐसे में प्लेटफॉर्म से चढ़ने के प्रयास में प्लेटफॉर्म पर महिलाएं, बच्चे व अन्य लोग एक के बाद एक सामान्य बोगियों की तरफ दौड़ते दिखे। इनमें कई बंद दरवाजे पीटते रहे, पर अंदर से यात्रियों ने दरवाजे नहीं खोले। कई सामान्य बोगियों के बंद दरवाजे कुलियों ने खुलवाए तो कुछ लोग प्लेटफॉर्म से ट्रेनों में चढ़ पाए। बावजूद इसके तीन ट्रेनें निकल जाने के बाद भी प्लेटफॉर्म पर मौजूद आधे लोग चढ़ने से चूक गए।
अयोध्या जाने को तीनों ट्रेनें में नहीं चढ़ पाए-
प्लेटफॉर्म पर मिले रामजीलाल, सीमा, अरुण ने बताया कि उन्हें अयोध्या जाना है। इसके लिए 11 बजे स्टेशन पर पहुंच गए थे, जिसके बाद तीन ट्रेनें सामने से निकल गईं। इसके बाद भी वह सामान्य बोगियों में भीड़ व उनके दरवाजे बंद होने के कारण ट्रेनों में नहीं चढ़ पाए। अब अगली ट्रेन के लिए स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर ही इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यहां चल रहे निर्माण कार्य के लिए वेटिंग रूम भी बंद है। ऐसे में खुले में सर्द हवाओं के बीच कंपकंपी महसूस हो रही है।
चाय, पकौड़े, बिस्किट-चिप्स से ही गुजारा-
रात में स्टेशन के बाहर ढाबे बंद होने पर प्लेटफॉर्म पर खानपान की तीन कैंटीन व पकौड़ों की दो ही रेहड़ियां खुली थीं। दूर तक रात में भोजन का कोई विकल्प न होने के चलते यात्री कैंटीन पर चाय, बिस्किट-चिप्स या रेहड़ियों पर पकौड़े खाते नजर आए। ऐसे ही यहां पहुंचे सन्नी ने कहा कि उसकी ट्रेन कई घंटे लेट हैं। भूख लगने पर स्टेशन के बाहर भोजन का विकल्प तलाशने गया तो सब ढाबे व अन्य खानपान की रेहड़ियां बंद मिले। ऐसे में प्लेटफॉर्म पर ही रेहड़ी से पकौड़े व कैंटीन से चाय लेकर काम चलाया है।
गुरुवार रात स्टेशन पर चार कर्मियों की ड्यूटी थी, जो स्टेशन के अलावा यार्ड व अन्य जगह भी गश्त कर रहे थे। जहां भी प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के होने के बावजूद सामान्य सहित अन्य सभी बोगियों के दरवाजे बंद होने का पता चलता है तो जीआरपी कर्मी उन्हें खुलवाते हैं।
-वलायती राम सैनी, प्रभारी, जीआरपी थाना।