साढौरा।
सरकार ने शिक्षा का स्तर सुधारने तथा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी सीबीएसई पैटर्न पर शिक्षा देने की मंशा से कस्बे के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल को दो साल पहले मॉडल संस्कृति स्कूल का दर्जा दिया था। केवल नाम बदलने के अलावा यहां शिक्षकों की तैनाती न किए जाने से स्कूल में पढ़ाई चौपट हो चुकी है। यहां शिक्षकों की कमी का आलम यह है कि 9वीं से 12वीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां शिक्षकों के 31 पदों में से 19 पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं छठी कक्षा से 8वीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों के पद तो 14 स्वीकृत हैं, लेकिन यहां केवल दो ही शिक्षक कार्यरत हैं। इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद रिक्त होने से पढ़ाई चौपट होना निश्चित है।
पढ़ाई चौपट होने का असर परीक्षा परिणामों से ही नजर आ रहा है। पिछले शैक्षणिक सत्र के दौरान इस स्कूल की दसवीं व बारहवीं कक्षा का पास प्रतिशत 70 से अधिक था। तो इस बार शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई चौपट होने से केवल 30 प्रतिशत बच्चे ही पास हो पाए हैं। अधिकतर विषयों का एक भी शिक्षक न होने के कारण अधिकतर बच्चों की इन विषयों में कंपार्टमेंट आई है। पास प्रतिशत बहुत कम होने से अभिभावक भी बहुत चिंतित है। शिक्षकों की कमी के विरोध में अभिभावक स्कूल के बाहर प्रदर्शन करने के अलावा शिक्षा विभाग से यहां शिक्षकों की तैनाती करने की बार-बार मांग कर रहे हैं। लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा इस तरफ कोई ध्यान न दिए जाने से अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में महंगी फीस लगाकर पढ़ने को मजबूर हो रहे हैं। या फिर बच्चों को प्राइवेट कोचिंग का सहारा लेना पड़ रहा है। यही कारण है कि इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में निरंतर कमी आ रही है। पिछले शैक्षणिक सत्र में यहां 940 बच्चे पढ़ते थे तो इस बार इनकी संख्या घटकर केवल 635 ही रह गई है।
पीजीटी के 31 में से 19 तो टीजीटी के 12 पद रिक्त
राजकीय स्कूल में 9वीं से बारहवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाने के लिए अर्थशास्त्र, संगीत, कंप्यूटर, सामाजिक विज्ञान, शारीरिक शिक्षा तथा कॉमर्स के पीजीटी शिक्षकों का एक-एक पद स्वीकृत हैं। लेकिन तैनाती एक की भी नहीं है। इसी तरह राजनीति विज्ञान के दोनों शिक्षकों का पद रिक्त है। इतिहास के दो में से एक ही तैनात है। हिंदी के तीन में से दो ही टीजीटी तैनात हैं। गणित के तीन तथा अंग्रेजी के पांच पद स्वीकृत हैं, लेकिन तैनाती एक की भी नहीं है। छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाने के लिए पंजाबी, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत, अंग्रेजी, व ड्राइंग विषयों के टीजीटी के एक-एक पद स्वीकृत हैं। तैनाती एक की भी नहीं है। हिंदी, गणित तथा शारीरिक शिक्षा के दो-दो पद स्वीकृत हैं, लेकिन कार्यरत एक की भी नहीं। यही नहीं एलिमेंटरी स्कूल के मुखिया का पद भी रिक्त है।
जिला परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष अनिल संधू ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण इस स्कूल की शिक्षा का ढांचा चरमराता जा रहा है। शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। सरकार सीबीएसई का दर्जा देने की वाहवाही पाने का प्रयास कर रही है, लेकिन यहां शिक्षकों की कमी को दूर करने के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रही है।
ट्रांसफर के बाद कमी हुई : रामरतन
प्रिंसिपल रामरतन ग्रेवाल ने बताया कि अगस्त 2022 में हुए ट्रांसफर ड्राइव के बाद से स्कूल में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इस बारे में शिक्षा विभाग के जिला से लेकर राज्य स्तर के अधिकारियों को कई बार सूचित किया जा चुका है।