संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राजकीय महाविद्यालय अहड़वाला में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्राध्यापिका डॉ. सुमन पंजेटा, डॉ. मनीषा व डॉ. अजय रतन ने साक्षरता तथा साइबर सिक्योरिटी को लेकर विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राध्यापक डॉ. रमेश धारीवाल ने की।
डॉ. रमेश धारीवाल ने कहा कि दुनिया की सबसे पहली रचना भारत में लिखी गई। सबसे प्राचीनतम विश्वविद्यालय तक्षशिला और नालंदा भी भारत में ही स्थापित है। जब दुनिया में शिक्षा का नाम ही नहीं था तब भारत में शिक्षा प्रणाली प्रचलित थी। भारत ने दूसरों को भी शिक्षा प्रदान की।
डॉ. सुमन पंजेटा ने साक्षरता और व्यक्तित्व विकास विषय पर विचार रखते हुए कहा हमें नित्य प्रति कुछ न कुछ आवश्यक सीखते रहना चाहिए। जो भी हम सीखते हैं उसे दूसरों के साथ भी अवश्य साझा करना चाहिए। अपनी पुरानी पुस्तकों को बेचने के स्थान पर जरूरतमंदों को दान करनी चाहिए ताकि शिक्षा का विकास हो सके। साक्षरता हमें बेरोजगारी से रोजगार की तरफ लेकर जाती है। इसके अतिरिक्त उन्होंने संप्रेषण कौशल की जानकारी दी।
डॉ. मनीषा ने विद्यार्थियों के समक्ष साक्षरता और सामाजिक परिवर्तन विषय पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि सबसे पहले साक्षरता दिवस आठ सितंबर 1966 में मनाया गया। आज भी बहुत से लोग अशिक्षित हैं और हमें समाज को शिक्षित करने में अपना योगदान देना चाहिए ताकि समाज में प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सके। उन्होंने विद्यार्थियों को प्राचीन शिक्षित भारत की जानकारी प्रदान की।
डॉ. अजय रतन ने साइबर सिक्योरिटी विषय पर कहा कि आज समाज में अनेक प्रकार के साइबर फ्रॉड हो रहे हैं। जब हम किसी अनजान व्यक्ति से अपना ओटीपी या पासवर्ड सांझा करते हैं तभी साइबर अपराध होता है। इस अवसर पर डॉक्टर मनीषा, महिंद्र, महक सिंगला, चंचल रानी, डॉ. ममता मग्गो, डॉ. अजय रतन व अनुकृति चौहान मौजूद रहे।