संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। दमकल विभाग पर अब केवल आग बुझाने की ही जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आपात स्थिति में मदद करने की जिम्मेदारी भी है। बावजूद इसके दमकल विभाग के पास गाड़ियों को खड़ी करने तक के लिए जगह नहीं है। जिला दमकल केंद्र एक छोटे से भवन में चल है। इस भवन में ही जिला दमकल अधिकारी कार्यालय, कंट्रोल रूम और एक क्लर्क का कमरा है। ज्यादातर गाड़ियां सारा दिन धूप में खड़ी रहती हैं।
जिले में दमकल विभाग के पास कुल 39 गाड़ियां हैं। इनमें से 16 गाड़ियां इंडस्ट्रियल एरिया यमुनानगर स्थित जिला दमकल केंद्र में खड़ी होती हैं। बाकी की गाड़ियां जगाधरी के गुलाब नगर में बने दमकल केंद्र और कस्बों में खड़ी होती है। जिला दमकल केंद्र में इतनी गाड़ियां होने के बावजूद यहां पर जगह का अभाव है। यहां भवन के नाम पर एक गाड़ी स्टैंड और तीन कमरे हैं।
स्टैंड में केवल पांच गाड़ियों को ही खड़ा किया जा सकता है। जिससे यह धूप से बची रहती हैं। बाकी की गाड़ियों को खुले आसमान के नीचे ही रखना पड़ता है। धूप के अलावा मौसम कोई भी हो यह गाड़ियां बाहर ही रहती हैं। मौसम का असर गाड़ियों पर पड़ता है। धूप से गाड़ियों का रंग जल्दी उड़ जाता है। इससे गाड़ियां समय से पहले ही पुरानी लगने लगती हैं। दूसरा गाड़ियाें के टायर धूप में जल्दी कमजोर हो जाते हैं।
स्टाफ को भी होती परेशानी
जगह के अभाव में दमकल के स्टाफ को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्टाफ की ड्यूटी शिफ्ट में लगती है। स्टाफ के लिए मात्र एक कमरा है। इसी कमरे में कंट्रोल रूम है, जिसमें रखे फोन पर लोग आग लगने की सूचना देते हैं। जगह के अभाव में स्टाफ को आराम करने में दिक्कत आती है। दमकल केंद्र के फोन पर आग लगने की सूचना आती रहती है, जिससे कर्मचारियों के आराम में विघ्न पड़ता है।
जिला दमकल केंद्र में जगह की कमी है। इस पर गाड़ियों को बाहर खुले में ही खड़ा करना पड़ता है। स्टाफ के लिए भी जगह कम है। नया दमकल केंद्र बनाने के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा है। - पंकज पराशर, जिला दमकल अधिकारी यमुनानगर।