संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की तरफ से आयोजित सात दिवसीय कृष्ण कथा के छठे दिन कथा व्यास साध्वी कालिंदी भारती ने रुकमणी विवाह एवं मीराबाई जी की भक्ति का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भक्ति मानव जीवन का वह शृंगार है जो जीवन को परिपूर्ण और अंतर आत्मा को आनंदित कर देता हैं।
उन्होंने कहा कि साकार स्वरूप परमात्मा अपनी लीलाओं से संपूर्ण मानव जाति को भ्रमित कर देता है, लेकिन जो भक्तजन उनके चरणों में समर्पण भाव से उसी के हो जाते हैं तो वह उनके सम्मुख अपनी माया के भेद भी खोलता है और उनका योग क्षेम वहन करने के लिए प्रकृति के नियमों को भी बदल देता है।
उन्होंने कहा कि माता रुकमणी ने जब अपना सर्वस्व प्रभु श्रीकृष्ण को ही मान लिया तब प्रभु ने सभी बंधनों को तोड़कर माता रुकमणी को अपनाया। मीरा बाई जी, जिनकी अंतर आत्मा कृष्ण प्रेम में लगी हुई थी, उन्हें समाज का बड़ा भारी विरोध सहना पड़ा, लेकिन उस विरोध के पश्चात भी उनकी कृष्ण भक्ति दृढ़ रहीं।
माता रुकमणी और मीराबाई जी की जीवन गाथा हमें यह समझाती है कि यदि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिए संकल्पबद्ध हो जाएं तो प्रतिकूल परिस्थितियां होने पर भी उस लक्ष्य को हम प्राप्त कर सकते हैं। प्रत्येक जीवात्मा के पास दो विकल्प होते हैं, या तो वह संसार में आसक्त होकर अपने सांसारिक कर्तव्यों के बोझ को उठाते हुए जीवन से मृत्युपर्यंत केवल अपने स्वार्थ पूर्ति हेतु प्रयासरत रहे अथवा ब्रह्मज्ञान द्वारा अपने जीवन के परम लक्ष्य को जानकर संसार के सभी कर्तव्यों का पालन करते हुए भी निरासक्त रहें।
साध्वी ने कहा कि जब भी धरा पर कोई भक्त, आत्मा जन्म लेता है तो वह सांसारिक बंधनों में बंधने के लिए नहीं अपितु संपूर्ण मानव जाति का मार्गदर्शन करने हेतु ही धरती पर आता है। उसका संपूर्ण जीवन परमात्मा के लिए समर्पित होता है, लेकिन वह अपने जीवन के द्वारा हमारा पथ प्रकाशित करता है ताकि हम उनके चरण चिन्हों पर चलते हुए अपने मानव जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर पाएं। कथा सुनने के लिए एसडीएम व्यासपुर जसपाल सिंह गिल सपरिवार पहुंचे।