संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 41वें दिन प्रवचनों में सुचेता महाराज ने भक्ति और संयम पर चर्चा की। उन्होंने भजन के माध्यम से भक्ति और संयम का महत्व समझाया।
उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग से आज के युग की सच्चाई बताई। उन्होंने बताया कि एक बार श्री विष्णु और माता लक्ष्मी में बहस हो गई की ज्यादा भक्त किसके हैं, दोनों ने अपनी-अपनी बात को सिद्ध करने के लिए धरती पर अवतार लिया। विष्णु जी एक सेठ के यहां प्रतिदिन प्रवचन करने लगे जिसमें बहुत भीड़ जमा होने लगी, कुछ समय बाद मात लक्ष्मी भी धरती पर आई और उन्होंने एक घर में पानी मांगा।
घर की मालकिन को प्रवचन के लिए देर हो रही थी, फिर भी उसने अनमने मन से लक्ष्मी को पानी दिया लक्ष्मी ने पानी पीकर जो सोने का पत्र था उसे फेंक दिया और कहा कि जो पात्र में एक बार इस्तेमाल कर लेती हूं उसको दोबारा इस्तेमाल नहीं करती। इससे उस स्त्री के मन में लालच आ गया उसने उन्हें खाने पर बुलाया और नाना प्रकार के व्यंजन बनाए ताकि वह जितना ज्यादा बर्तनों में परोसेगी उतने ज्यादा सोने के बर्तन उसे मिलेंगे।
इस प्रकार की बातें जब सेठ के कान में पहुंची तो सेठ भी विष्णु जी को निकाल कर अपने घर में लक्ष्मी जी को बुलाने की तैयारी करने लगा, तब विष्णु को समझ में आया कि आज के कलयुग में लक्ष्मी का ज्यादा महत्व है। इसके बाद साध्वी समीक्षा महाराज ने श्रावक और सम्यक शब्दों की विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने समझाया सम्यक का मतलब है संपूर्ण और श्रावक का मतलब है जो विवेक से श्रवण करते हुए कर्म करता है। एक भजन से माध्यम से उन्होंने समझाया कि हर समय धर्म ध्यान के लिए हम सोचते हैं कल कर लेंगे उस कल के चक्कर में परसों भी कब की निकल चुकी है लेकिन भजन करने का समय इंसान को नहीं मिलता है