जगाधरी। इंदिरा मार्केट के नंद लाल मैदान में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से करवाई जा रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। आशुतोष महाराज की शिष्या कालिंदी भारती ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
साध्वी ने कहा कि समाज मानव मन की अभिव्यक्ति है। जब-जब संतों के आदर्शों का परित्याग कर मानव भोग वासना की ओर प्रवृत्त हुआ तब-तब समाज विषाक्त होता है। जरूरत मन को प्रदूषण से मुक्त करने की है। जब मन का प्रदूषण समाप्त होगा तब बाहरी पर्यावरण स्वतः ही स्वच्छ हो जाएगा। इसके लिए जरूरी है ब्रह्मज्ञान की जो मानसिक शुद्धता का सशक्त साधन है।
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उन्होंने कहा कि हमें आवश्यकताओं और लालसाओं में भेद करना होगा। जितनी लालसाएं बढ़ेंगी उतना ही प्रकृति का दोहन होगा। संतों ने हमें चेताया कि भूमि के सुखों को भोगों तो त्यागपूर्वक सही है।, यदि त्यागपूर्वक नहीं होगा तो भोगने की क्षमता व सामर्थ्य नहीं रहेगा।
उन्होंने कहा कि आधुनिक मानव जिस गति से पर्यावरण का शोषण कर रहा है, उसके परिणामस्वरूप आने वाले कुछ समय में पृथ्वी पर न तो पीने के लिए स्वच्छ जल बचेगा और न ही सांस लेने के लिए वायु होगी।