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Yamuna Nagar News: सोम और पथराला नदी का पानी उतरने के बाद नजर आई बर्बादी

Fri, 27 Jun 2025 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर/छछरौली। दो दिन खई बारिश से बरसाती नदियों में आया उफान वीरवार को शांत हो गया। सोम व पथराला नदी का पानी अब उतर गया है। वहीं पानी अपने पीछे बर्बादी के निशान छोड़ गया है। क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों की 200 एकड़ से ज्यादा खेत बर्बाद हो गए हैं। खेतों में अब फसल की जगह रेत व पहाड़ी मिट्टी दिख रही है।
सोम व पथराला में आई बाढ़ से छछरौली के करीब आधा दर्जन गांव की 200 एकड़ से ज्यादा में लगी धान व गन्ने की फसल बर्बाद हो गई है। इसके अलावा याबूकपुर गांव के पास नेशनल हाईवे पुलिया टूटी गई। इससे सड़क खिसकने लगी है। ऐसे में प्रशासन ने इस रूट डायवर्ट किया है। खानूवाला में स्थिति पहले से ठीक है। ग्रामीण बारी-बारी से नहर पटरी के पास पहरा देकर पानी की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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सोम व पथराला में आए उफान के बाद खानूवाला के ग्रामीणों ने अपनी व परिवार की सुरक्षा का प्रबंध शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि अभी बारिश का पूरा महीना शेष है। यदि समय रहते बंदोबस्त नहीं किए गए तो इससे ज्यादा भयावह स्थिति बन सकती है। चूंकि अभी ज्यादा बारिश नहीं हुई।
इस दौरान छछरौली के किसान गगनदीप, अमरजीत, रमेश, मनोज, संजीव व राजीव ने बताया कि सोम व पथराला नदी में आई बाढ़ ने उनकी फसलें पूरी तरह बर्बाद कर दी हैं। सबसे ज्यादा नुकसान धान की फसल को हुआ है जो कि अभी दो-चार दिन पहले ही लगाई थी। धान की पौध पानी के साथ बहकर आई मिट्टी में पूरी तरह से दब गई है। सबसे बड़ी समस्या मवेशियों के चारे की हो गई है। चारा पूरी तरह से खराब हो गया है।
किसानों का कहना है कि प्रशासन व सिंचाई विभाग हर साल कई लाख रुपये खर्च करता है, ताकि बाढ़ का पानी नदियों से बाहर निकल कर रिहायशी इलाकों को नुकसान न पहुंचा पाए। बावजूद इसके कोई समाधान होता नजर नहीं आता है। यह हर साल होता है कि किसानों की खून पसीने की कमाई बाढ़ का पानी बर्बाद कर देता है और किसानों को मुआवजे के नाम पर कुछ भी नहीं मिलता है। बाढ़ के पानी से नुकसान के बाद सरकार हर साल विशेष गिरदावरी कर मुआवजा देने की बात तो करती है परंतु इससे किसानों के जख्मों पर मरहम नहीं लगता है। किसानों को हर वर्ष फसल खराब होने का दर्द सहन करना पड़ता है। उनकी मांग है कि सोम व पथराला नदियों में पानी को नदियों से बाहर न निकलने के स्थायी इंतजाम किए जाए, ताकि लोगों को इसका खामियाजा न भुगतना पड़े।
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हथिनीकुंड बैराज पर पहुंचा 14,814 क्यूसेक पानी

प्रतापनगर। पहाड़ों पर बारिश के बाद से यमुना का जलस्तर बढ़ा है। वीरवार को हथिनीकुंड बैराज पर शाम छह बजे 14,814 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया है। इसमें से यमुना में 352 क्यूसेक, पश्चिमी नहर 12,452 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जबकि उत्तर प्रदेश को 2,010 क्यूसेक पानी दिया गया। हथिनीकुंड बैराज कार्यालय के अनुसार सुबह छह बजे 14,495 क्यूसेक, शाम सात बजे 14,573 बजे, आठ बजे 14,936 बजे, नौ बजे 15,288 क्यूसेक, सुबह दस बजे 14,430 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। सुबह 11 बजे 14,754 क्यूसेक, दोपहर 12 बजे 13,574 क्यूसेक, दोपहर एक बजे 15,307 क्यूसेक, दो बजे 14,979 क्यूसेक, तीन बजे 14,979 क्यूसेक, शाम चार बजे 14,814 क्यूसेक, शाम पांच बजे 14,979 क्यूसेक और छह बजे 14,814 क्यूसेक पानी रिकॉर्ड किया गया। संवाद
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