यमुनानगर। डीसी कार्यालय पर आंगनबाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स यूनियन का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। यूनियन सहित सीटू व सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले आंगनबाड़ी वर्कर्स ने जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
इस दौरान अनाज मंडी में मुस्तफाबाद की उपप्रधान दयावती ने प्रदर्शन की अध्यक्षता की। इसका संचालन सुनीता करेड़ा ने किया। प्रदर्शन को रिटायर्ड कर्मचारी संघ जिला प्रधान विनोद त्यागी, रोशन लाल, बर्खास्त पीटीआई शिक्षक जिला प्रधान यशपाल राणा ने समर्थन दिया। यहां संघ नेताओं ने आंगनबाड़ी वर्कर्स को संबोधित किया। नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार व राज्य सरकार तेजी से आईसीडीएस और शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू कर प्ले-वे स्कूलों द्वारा आईसीडीएस को निजी हाथों व एनजीओ को सौंपने की योजना पर काम रह रही है। जिसे कर्मचारी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बातचीत के दौरान जो मांगें मानी गई थी, उन्हें अभी तक लागू नहीं किया गया है। जिस कारण प्रदेश भर की तमाम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान शशिबाला, दीपमाला, मीना शर्मा, सुनैना सहित अन्यों ने आंगनबाड़ी वर्कर्स को संबोधित किया।
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यह हैं मांगें
-आंगनवाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
-कर्मचारी बनाए जाने तक न्यूनतम वेतन 24000 दिया जाए।
-2018 में की घोषणाएं लागू कर महंगाई भत्ते की तमाम किस्त मानदेय के साथ दी जाए।
-विभाग द्वारा बिना फोन व अन्य संसाधन दिए वर्कर्स पर ऑनलाइन काम का दबाव न दिया जाए।
-प्रधानमंत्री द्वारा सितंबर 2018 में की वर्कर्स व हेल्पर्स की 1500 एवं 750 रुपये की बढ़ोतरी एरियर सहित दिया जाए।
-आंगनबाड़ी वर्कर्स को पांच लाख व हेल्पर्स को तीन लाख रुपये सेवानिवृत्ति का लाभ दिया जाए।
-आंगनबाड़ी वर्कर से सुपरवाइजर के रूप में 50 प्रतिशत पदोन्नति तुंरत लागू की जाए।
-आंगनबाड़ी केंद्रों का बढ़ा किराया ग्रामीण क्षेत्र का 2000, छोटे कस्बे/शहर का 3000 व बड़े शहरों का 5000 रुपये किया जाए। किराया कम देने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाए।
-वर्कर्स व हेल्पर्स को किसी भी विभागीय ट्रेनिंग या बैठक में बुलाने पर टीए व डीए दिया जाए।
-वर्कर्स व हेल्पर्स को दुर्घटना पर इलाज का पूरा खर्च व मृत्यु पर अन्य विभागों की तरह तीन लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
-वर्कर्स व हेल्पर्स की वर्दी की राशि बढ़ाई जाए व सालाना कम से कम 1600 रुपये की जाए।