मिड-डे मील में आया निम्न गुणवता वाला राशन। संवाद
व्यासपुर। हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ ने राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को दिए जाने वाले मिड-डे मील के राशन की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई है। संघ ने हरियाणा एग्रो से हरित स्टोरों पर पहुंचाई जा रही खाद्य सामग्री की तत्काल गुणवत्ता जांच और सैंपलिंग कराने की मांग की है। संघ का कहना है कि कई विद्यालयों से नमक, दाल, तेल और चने समेत विभिन्न खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं।
संघ जिला प्रधान सतपाल ने कहा कि पिछले महीने सप्लाई किए काले चनों की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई थी। कुछ दालों में कीड़े मिलने की बात भी सामने आई है।
ऐसे में अध्यापक असमंजस में हैं कि सामग्री का इस्तेमाल बच्चों के लिए तैयार होने वाले भोजन में करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा। उन्होंने कहा कि मामला केवल राशन की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरने वाली सामग्री से भोजन तैयार करना उचित नहीं है। उन्होंने विभाग से खाद्य सामग्री के नमूने लेकर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
संघ का आरोप है कि कई विद्यालयों में हरियाणा एग्रो की ओर से विद्यालयों की मांग के बिना अतिरिक्त या अनुपयुक्त मात्रा में सामग्री भेजी जा रही है। जब अध्यापक हरित स्टोर संचालकों से गुणवत्ता को लेकर बात करते हैं तो उनका कहना होता है कि सामग्री हरियाणा एग्रो से सीधे सप्लाई हुई है और पैकिंग व गुणवत्ता में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं है।
जिला सचिव चांद राम ने कहा कि मांग के अनुसार राशन नहीं मिलने और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों से मिड-डे मील की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। प्रदेश महासचिव विनोद मोहड़ी ने उच्च अधिकारियों से तत्काल सैंपलिंग और लैब परीक्षण करवाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि निम्न गुणवत्ता या अनुपयोगी सामग्री मिलने पर विद्यालयों पर उसका इस्तेमाल करने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए और ऐसी सामग्री तत्काल बदली जाए। संघ ने राशन आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा कर जवाबदेही तय करने की मांग की है।
वहीं, आवश्यकता पर पूर्व व्यवस्था की तरह विद्यालयों को विद्यार्थियों की संख्या और मांग के अनुसार अधिकृत हरित स्टोर से गुणवत्तापूर्ण राशन खरीदने की अनुमति देने की मांग की है।