माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। कोरोना महामारी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने प्रदेशभर में लॉकडाउन लगाया है। लॉकडाउन से संक्रमण के फैलाव में तो अभी तक कोई कमी आती दिखाई नहीं दी है, लेकिन जिले के उद्योग धंधे प्रभावित हो गए हैं। हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एवं इंडस्ट्री के यमुनानगर चैप्टर ने आशंका जताई है कि सारे उद्योगों को नहीं चलाया गया तो शहर की प्लाइवुड और मेटल इंडस्ट्री के साथ साथ लकड़ी व ट्रांसपोर्ट उद्योग बर्बाद हो जाएगा। लॉकडाउन की वजह से शहर की इंडस्ट्री को रोजाना करीब 10 से 12 करोड़ रुपये का सीधे तौर पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर इसमें अन्य छोटे-छोटे उद्योगों और ट्रेडर्स को भी शामिल कर लिया जाए तो यह नुकसान 20 करोड़ प्रतिदिन तक है।
कारोबार बुहत ही बुरे दौर से गुजर रहा है। पिछले साल भी लॉकडाउन से बड़ा नुकसान झेलना पड़ा था। कई महीनों की मंदी के बाद अब कारोबार के पटरी पर लौटने की उम्मीद थी, लेकिन फिर से कोरोना महामारी ने फैक्टरियों को बंद करवा दिया है। यमुनानगर जैसे छोटे शहर के उद्यमी पूरी तरह से बर्बाद होने के कगार पर हैं। जो नुकसान हुआ है, उसकी वर्षों तक भरपाई नहीं हो पाएगी। -उम्रेश सोंधी, प्रेजीडेंट, हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एवं इंडस्ट्री
पिछले लॉकडाउन में प्लाइवुड उद्यमियों का करोड़ों का नुकसान हुआ था। अब भी ऐसे ही हालात बन रहे हैं। हमने तो पहले भी प्रशासन से आग्रह किया था कि लॉकडाउन में सभी इंडस्ट्री चलाई जाएं, लेकिन प्रशासन ने नगर निगम क्षेत्र के बाहर की इंडस्ट्री को तो इजाजत दे दी, लेकिन शहरी क्षेत्र की इंडस्ट्री बंद पड़ी हैं। जिले में सारी फैक्टरियां एक दूसरे पर निर्भर हैं। -ज्ञानेश्वर क्वात्रा, उपाध्यक्ष
जिले में जिन फैक्टरियों को चलाने की इजाजत दी गई हैं, उनमें से अधिकतर एक तरह से बंद ही हैं। फैक्टरियां बंद होने से श्रमिकों का पलायन भी हो रहा है। जिसे रोकना बहुत जरूरी है। क्योंकि एक बार अगर श्रमिक घर चले गए तो फिर चार पांच महीने तक वे आने वाले नहीं है। कोरोना महामारी के साथ जंग के बीच आर्थिक गतिविधियों को जारी रखने की दिशा में बढ़ना होगा। -राजेश सोंधी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष
एक बात को सबको समझनी होगी कि हमें अब कोरोना के साथ जीना भी है और कारोबार भी करना है। मेरा सुझाव है कि जिस तरह से प्रशासन ने आवश्यक सेवाओं से जुड़े उद्योगों को खोलने की इजाजत दी है, उसी तरह प्लाइवुड, मेटल व अन्य सामान की यूनिट्स के लिए भी कोई शेड्यूल बनाया जाए और उद्योग खोलने की अनुमति दी जाए। -राज चावला, पूर्व प्रधान
व्यापारी वर्ग अभी भी कोरोना की पहली लहर से हुए नुकसान से उबर नहीं पाया है और दूसरी लहर से भी काफी नुकसान हो रहा है। शहर में अधिकतर उद्यमियों का व्यापार पूरी तरह से है, ऐसे में उन्हें कम से कम टेकअवे के साथ व्यवसाय शुरू करने दिया जाना चाहिए। सभी उद्यमी लेबर को पूरा मेहनताना और राशन देने को भी तैयार हैं। -सुमीत गुप्ता, महासचिव