गोविंदपुरी स्थित भगवान परशुराम सामुदायिक केंद्र में चल रही श्रीराम कथा में कथा व्यास इंद्रेश महाराज ने रावण वध व भगवान राम अयोध्या वापसी का प्रसंग सुनाया। कथा व्यास ने अशोक वाटिका में आए हनुमान का सुंदर वर्णन किया और किस प्रकार वह भूख कारण पूरी वाटिका को ध्वस्त कर देते हैं, के बारे में बताया।
कथावाचक इंद्रेश महाराज ने कथा में बताया कि हनुमान ने किस प्रकार श्रीराम के पास पहुंचकर लंका में सीता माता के सुरक्षित होने को बताया। इसके उपरांत एक के बाद एक रावण परिवार के सदस्यों के साथ भगवान श्रीराम का युद्ध हुआ। धीरे धीरे सभी परिवार के सदस्य व रावण की सेना मारी। इस दौरान रावण के बेटे मेघनाथ के साथ युद्ध करते हुए लक्ष्मण भी मूर्छित हुए और उन्हें होश में लाने के लिए हनुमान पूरा पर्वत लेकर आए। जिस पर संजीवनी बूटी लगी हुई थी। संजीवनी बूटी के प्रयोग से लक्ष्मण को मूर्छा से बाहर लाया गया। इसके बाद मेघनाथ का वध हुआ। एक एक कर रावण के परिवार के सभी योद्धाओं का अंत हो गया और अंत में रावण को भी श्रीराम ने अपने बाणों से मार गिराया। अयोध्यावासियों ने भगवान श्रीराम का जमकर स्वागत किया। पूरे अयोध्या में खुशियां मनाई गई। एक बार फिर अयोध्या में भरत मिलाप हुआ और उसके बाद भगवान श्रीराम का राज्य अभिषेक हुआ। स्वामी इन्द्रेश जी महाराज ने बताया कि जो व्यक्ति भगवान श्रीराम के चरित्र का गुणगान करता है या श्रवण करता है। उसे पापों से मुक्ति मिलती है और वह 84 लाख यौनियों से छुटकारा पाकर भगवान के चरणों में वास करता है और उसे आवागमन से मुक्ति मिल जाती है। इस दौरान रोमी, राकेश, पीआर त्यागी, सुरेश, सतीश, सेवापाल, रामपाल, बलिंद्र, मनोज, अरुण आदि मौजूद रहे।