यमुनानगर। गर्मी का असर बढ़ते ही नहरों में नहाने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी है। खासकर नाबालिग बच्चे बिना किसी सुरक्षा के नहरों में उतर रहे हैं, जिससे हर साल होने वाले हादसों का खतरा और गहरा गया है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता इंतजाम नजर नहीं आ रहे।
बाडी माजरा पुल के पास तो नई नहर पर बने घाट पर सरिये निकल रहे हैं। यहीं पर किशोर नहा रहे हैं। ऐसे में सरिये लगने से वह चोटिल भी हो सकते हैं। इससे जान जाने का खतरा और भी ज्यादा बढ़ गया है। बाडी माजरा, फतेहपुर पुल, हमीदा हेड, चीट्टा मंदिर के पास किशोर ओर युवाओं का जमावड़ा रहता है। इनमें 8 से 16 वर्ष तक के किशारों की संख्या सबसे अधिक है।
ये बच्चे बिना किसी निगरानी के नहर में उतरकर नहाते हैं और कई बार गहरे पानी में चले जाते हैं, जिससे डूबने का खतरा बना रहता है। गोताखोर राजीव ने बताया हर वर्ष करीब नहर में डूबने से करीब 50 से 60 मौत हो जाती है। इनमें अधिकतर बच्चे और किशोर होते हैं। बावजूद इसके न तो प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं और न ही लोगों को जागरूक करने के लिए कोई ठोस पहल नजर आती है।
नहर के किनारों पर चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं, जिससे लोग खतरे को नजरअंदाज कर रहे हैं। कई स्थानों पर सुरक्षा रेलिंग, बैरिकेडिंग या लाइफ गार्ड की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में बच्चे बेखौफ होकर नहर में कूद जाते हैं। अभिभावकों की लापरवाही भी इस समस्या को और गंभीर बना रही है, क्योंकि वे बच्चों पर पर्याप्त निगरानी नहीं रखते।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि नहरों के किनारे चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही पुलिस और संबंधित विभागों को नियमित गश्त बढ़ानी चाहिए, ताकि किशोर और युवाओं को नहर में उतरने से रोका जा सके। संवाद
नहरी क्षेत्रों के आसपास पुलिस गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। अभिभावक भी बच्चों पर नजर रखें और उन्हें नहर में नहाने से रोकें, ताकि डूबने जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। - कमलदीप गोयल, एसपी यमुनानगर