यमुनानगर। यमुना नदी का सीना चीर कर हो रहे अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए सरकार सख्त हो गई है। अवैध खनन की रोकथाम के लिए अब खनन विभाग अनमैंड एयर व्हीकल यानी ड्रोन का उपयोग करेगा। जिसके तहत माइनिंग इलाके की चप्पे-चप्पे की निगरानी होगी और उसकी मैपिंग भी तैयार की जाएगी। शुरुआती चरण में ड्रोन का इस्तेमाल यमुना के ताजेवाला, बेलगढ़ और कनालसी घाट के आसपास करने पर विचार चल रहा है। इसके बाद जठलाना, गुमथला, साढौरा, बिलासपुर, छछरौली आदि क्षेत्र में किया जाएगा। प्रथम चरण में अवैध खनन की साइट को चिह्नित करने के लिए खनन विभाग यमुनानगर जिले में ड्रोन सर्वे करवाएगा। सर्वे में जगह चिन्हित होने के बाद उनकी निगरानी भी ड्रोन से की जाएगी। इसके लिए जिला खनन अधिकारी ने विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर ड्रोन के प्रयोग की अनुमति मांगी है। ड्रोन के इस्तेमाल की भनक मिलते ही माइनिंग माफिया में हड़कंप मच गया है और वे अपने स्तर पर इस प्रक्रिया को होल्ड करवाने में जुट गए हैं। शुक्रवार को चंडीगढ़ से जांच के लिए आए स्टेट जियोलॉजिस्ट दीपक हुड्डा और सीनियर सर्वेयर सुरेश शर्मा को खतरनाक तरीके से अवैध खनन के निशान मिले थे।
ये मिलेगा फायदा -जिले के खनन क्षेत्रों के आस-पास रात होते ही खनन माफियाओं की हलचल तेज हो जाती है। सालाना करोड़ों रुपए का राजस्व नुकसान सरकार को अवैध खनन की वजह से होता है। क्योंकि माइनिंग माफिया अपने प्रभाव के चलते रॉयल्टी की पर्ची भी नहीं कटवाते और अगर ठेकेदार के लोग रॉयल्टी मांगते हैं तो उन पर हमला तक कर देते हैं। ड्रोन के माध्यम से प्रशासन व पुलिस के अफसर यह भी देखेंगे कि कहां-कहां खनन हो रहा है और फिर इस पर तत्काल कार्रवाई कराई जाएगी। यानी चिह्नित साइट पर मूवमेंट होते ही अधिकारियों को भी भनक लग जाएगी और वे तुरंत इस पर एक्शन लेने के आदेश दे सकेंगे।
संयुक्त टीम करेगी पेट्रोलिंग
ताजेवाला में अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए सिंचाई विभाग, खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम पेट्रोलिंग करेगी। शिफ्ट वाइज यहां ड्यूटी दी जाएगी। हर शिफ्ट में सिंचाई व खनन विभाग के दो-दो कर्मचारी मौजूद रहेंगे। इससे कर्मचारियों की मिलीभगत की गुंजाइश कम हो जाएगी। क्योंकि अवैध खनन में इन तीन विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं।
स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट बंद
-ताजेवाला, बेलगढ़, कनालसी, नगली, पौबारी, जठलाना, गुमथला, रणजीतपुर, बिलासपुर, छछरौली, साढौरा सहित लगभग पूरे यमुनानगर जिले में धड़ल्ले से अवैध खनन चल रहा है। यहां मुख्य रूप से पत्थर, कोरसेंट, बजरी, बदरपुर और मोटे रेत का अवैध खनन होता है। जो क्षेत्र खनन के लिए घोषित नहीं है, वहां पर भी माइनिंग माफिया खुलेआम जमीन खोद रहे हैं। एक ओर जहां छापे की कार्रवाई की जा रही है, दूसरी ओर अवैध खनन कराने वाले स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट संचालकों पर भी सरकार शिकंजा कस रही है। बताया जा रहा है कि उनके सरपरस्त नेताओं और अधिकारियों ने कुछ दिन अपना कामकाज बंद रखने को कहा है। ऐसे में अवैध रूप से चल रहे क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट संचालक अपना सामान तक समेटने लगे हैं। ताकि अगर उच्च स्तरीय जांच होती है तो ये साबित न हो सकें कि यहां कुछ अवैध कारोबार हो रहा था।
-मार्च महीने में यमुनानगर का चार्ज संभालने के बाद जिले की विभिन्न माइनिंग साइट्स का निरीक्षण किया और उनमें से अधिकांश पर अत्याधिक अवैध माइनिंग का होना पाया। मैन पावर की कमी है। इस वजह ड्रोन बेहतर विकल्प है। डायरेक्टर को पत्र लिखकर ड्रोन से सर्वे की परमिशन मांगी गई है।-संजय सब्बरवाल, जिला खनन अधिकारी