तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार बाप-बेटे को कुचला, पिता की मौके पर ही मौत, बेटे ने अस्पताल में तड़प-तड़प कर तोड़ा दम
साढौरा। तेज रफ्तार कार एक परिवार पर काल बनकर आई। नौवीं क्लास में पढ़ने वाले अपने बेटे को बाइक पर छोड़ने जा रहे फकीरचंद को कार ने पीछे से टक्कर मार दी। फकीरचंद की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके बेटे ने इलाज के अभाव में सरकारी अस्पताल में दम तोड़ दिया। गांव ढल्लौर निवासी 40 वर्षीय फकीर चंद राजमिस्त्री का कार्य करता था। और 15 वर्षीय बेटा पंकज गांव सरावां के राजकीय स्कूल में 9वीं का छात्र था। सोमवार को उसका सामाजिक का पेपर था। रोजाना वह अपनी साइकिल पर स्कूल जाता था, लेकिन सुबह उसे किसी कारण से देरी हो गई। स्कूल छोड़ने के लिए उसने अपने पिता फकीरचंद से कहा। इसके बाद उन्होंने बाइक बाहर निकाली। बाइक पर सवार होकर दोनों बाप-बेटा स्कूल के लिए रवाना हो गए। जैसे ही फकीरचंद बेटे पंकज के साथ सरावां से पहले पीर की मजार के पास पहुंचा तो पीछे से तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद भी कार उन्हें काफी दूर तक घसीटते हुए ले गई। लेकिन हादसे के बाद चालक मौके से कार लेकर फरार हो गया। हादसे का शोर सुनकर आसपास लोग वहां पहुंचे और किसी तरह से अस्पताल पहुंचाया, लेकिन यहां भी डॉक्टर मौजूद नहीं मिले।
एकमात्र कमाने वाला
पत्नी जसविंद्र कौर को पति फकीरचंद व बेटे पंकज की मौत की खबर मिली तो वह बेसुध होकर नीचे गिर पड़ी। मृतक फकीरचंद के भतीजे अमन व परमजीत ने बताया कि उनके चाचा द्वारा ही घर का पोषण होता था। हादसे ने जसविंद्र कौर के माथे का सिंदूर मिटा दिया और बेटे को कलेजे से दूर कर दिया। पति और बेटे की एक साथ लाशों को देखकर पत्नी बेसुध हो गई। गांव की दूसरी महिलाओं ने संभाला। पूरा माहौल गमगीन हो गया। उधर, हादसे के बारे में जिस भी पता चला वह उस ओर दौड़ पड़ा।
अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं
मृतक फकीरचंद के भाई रघुबीर ने बताय कि उनके भतीजे को जब सरकारी अस्पताल में लाया गया तब उसकी सांस चल रही थी। अस्पताल में डॉक्टर न होने की वजह से उसे इलाज नहीं मिल सका। दरअसल साढौरा के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी है और रात की शिफ्ट के लिए कोई डॉक्टर नहीं है। इस वजह से सुबह के समय यहां डॉक्टर नहीं था।
हादसे में पिता और पुत्र की मौत हो चुकी है। कार चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। जिसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। फिलहाल पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया।
-देवेंद्र कुमार, एचएचओ, साढौरा।
फोटो- 13 से 16 तक