उल्टी लगने के बाद अस्पताल में बुजुर्ग की मौत, हंगामा कर बोले परिजन, डॉक्टर के न आने से गई जान, शव लेने से किया इंकार
हेड नर्स व हेल्पर ने डॉक्टर को व्हाट्सएप पर रिपोर्ट भेज किया बुजुर्ग का उपचार
परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
सिटी एसएचओ के समझाने पर माने परिजन, चार घंटे बाद उठाया शव
अढ़ाई महीने पहले भी एक महिला की मौत पर हुआ था हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जगाधरी के निजी अस्पताल में उल्टी लगने के बाद उपचार के लिए आए मांडखेड़ी की टपरियां निवासी बलजीत (62) की मौत हो गई। परिजन मंगलवार शाम को बलजीत को अस्पताल लेकर आए थे। जहां एक नर्स व हेल्पर ने उसे उपचार दिया। परिजन डॉक्टर को बुलाने की बात कहते रहे, लेकिन स्टाफ ने मरीज की रिपोर्ट व्हाट्सएप कर डाक्टर को भेजी और उपचार दिया। करीब 13 घंटे बाद बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे उपचार के दौरान बलजीत ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने डॉक्टर की लापरवाही से उसकी मौत होने का आरोप लगाया और शव को उठाने से मना कर दिया। परिजनों का कहना था कि डॉक्टर की लापरवाही से बलजीत की जान गई है। परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। सूचना मिलने पर शहर जगाधरी पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाकर शांत किया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों के हवाले कर दिया।
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न छुट्टी दी और न ही डॉक्टर बुलाया
मांडखेडी की टपरियां निवासी प्रेमपाल ने बताया कि उसके पिता हिंदू गर्ल्स स्कूल में पीयन की जॉब करते थे। मंगलवार शाम करीब सात बजे उसके पिता बलजीत को अचानक उल्टी लगी। उल्टी लगते ही वो बेहोश हो गए। वे तुरंत उसे अस्पताल में लेकर पहुंचे। साढ़े सात बजे उन्होंने अपने पिता को अस्पताल में एडमिट किया। तब अस्पताल स्टाफ ने उन्हें उपचार देना शुरू किया। उन्होंने डॉक्टर को बुलाने की बात कही तो उन्होंने कहा कि डॉक्टर साहब आने वाले है। लेकिन डॉक्टर नहीं आए। सारी रात वे डॉक्टर को बुलाने को कहते रहे। लेकिन डॉक्टर नहीं आए। डॉक्टर के न आने पर उन्होंने छुट्टी देने की बात कहीं, ताकि दूसरे अस्पताल में उपचार करवा सके। लेकिन उन्हें छुट्टी भी नहीं दी गई।
चार घंटे तक नहीं उठाने दिया शव :
पूरी रात डॉक्टर के न आने पर सुबह साढ़े आठ बजे बलजीत ने दम तोड़ दिया तो परिजन भड़क उठे। गुस्साएं परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और शव उठाने से मना कर दिया। अस्पताल प्रशासन एंबुलेंस में शव रखने के लिए उसे ले जाने लगा, लेकिन परिजनों ने शव उठाने नहीं दिया और डॉक्टर पर कार्रवाई करने की मांग करने लगे। करीब 12 बजे पुलिस ने मौके पर आकर परिजनों को समझाया। आधा घंटे तक माथापच्ची कर परिजनों को उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर शव को उठवाया।
ढाई माह पहले महिला की मौत पर नहीं दिया था शव :
बीती 14 सितंबर को भी अस्पताल में उल्टी व दस्त की बीमारी से पीड़ित झारखंड के रांची निवासी 30 वर्षीय संजू देवी की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजन जब शव ले जाने लगे, तो स्टाफ ने 24 हजार रुपये का बिल बनाकर उनके सामने रख दिया। पूरे पैसे न देने पर स्टाफ ने शव देने से मना कर दिया था। तब परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया। बाद में चिकित्सक डॉ. विकास सक्सेना पहुंचे और परिजनों को शव दिया।
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डॉक्टर के छुट्टी होने की बात पहले ही बताई थी
अस्पताल के मैनेजर राहुल व मेडिी0कल रिप्रजेंटेटिव राकेश खान ने बताया कि अस्पताल मालिक वैष्णों देवी गए है। जबकि डॉक्टर छुट्टी पर है। डॉक्टर के छुट्टी पर होने की बात उन्होंने परिजनों को पहले ही बता दी थी। अस्पताल की हेड नर्स रीटा व टेक्निशीयन सुभाष कांबोज ने डॉक्टर से सलाह लेकर उपचार दिया। उपचार करने में कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
वर्जन
अस्पताल में हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। परिजनों से लिखित में शिकायत ली गई है। जिसकी जांच की जा रही है। शव का पोस्टमार्टम करवा दिया गया है। रिपोर्ट आने पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। अभी मौत के वास्तविक कारणों का नहीं पता चल पाया है।
- इंस्पेक्टर राजीव मिगलानी, एसएचओ, थाना शहर जगाधरी।
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